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जन्मदिन विशेष: फैजान अशरफ़

छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल जशपुर की माटी से निकलकर देश की सबसे बड़ी पंचायत (संसद) और फिर सूबे की विधानसभा तक अपनी धाक जमाने वाली श्रीमती गोमती साय आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं।

एक साधारण किसान परिवार से राजनीतिक के शीर्ष तक पहुँचने वाली गोमती साय का जीवन संघर्ष, अटूट निष्ठा और जनसेवा की एक जीवंत और प्रेरणादायी कहानी है। सहज, सरल और सदैव जमीन से जुड़े रहने वाले व्यक्तित्व की धनी गोमती साय ने न केवल संगठन में अपनी काबिलियत साबित की, बल्कि हर मोर्चे पर जनता के भरोसे को भी जीता है।

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शुरुआती जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि

श्रीमती गोमती साय का जन्म 22 मई 1978 को जशपुर जिले के ग्राम कोकियाखार में पिता श्री शुभशरण सिंह और माता श्रीमती बसंती बाई के घर हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा स्थानीय परिवेश में ही संपन्न हुई। उच्च माध्यमिक शिक्षा (12वीं) तक पढ़ाई पूरी करने के बाद, 28 मई 1991 को उनका विवाह श्री निरंजन साय के साथ हुआ।

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पेशे से कृषि को अपना मुख्य व्यवसाय मानने वाली गोमती साय के भीतर जनसेवा और सामाजिक बदलाव का जज्बा बचपन से ही था। यही वजह रही कि शादी के बाद उन्होंने घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ खुद को सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों से पूरी तरह जोड़ लिया। वर्तमान में वे जशपुर जिले की फरसाबहार तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम मुण्डाडीह (पोस्ट भगोरा) की स्थायी निवासी हैं, जहाँ से उनका जनता से सीधा जुड़ाव आज भी कायम है।

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एक जमीनी कार्यकर्ता से सांसद बनने का सफर

गोमती साय का सार्वजनिक जीवन इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे एक आम कार्यकर्ता अपनी मेहनत के दम पर सर्वोच्च सदन तक पहुँच सकता है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के एक बेहद साधारण और निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में अपने राजनैतिक सफर का आगाज किया था। जमीनी स्तर पर काम करते हुए उन्होंने संगठन के कई महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारियाँ संभालीं और हर दायित्व को पूरी ईमानदारी से निभाया। उनकी इसी कर्मठता को देखते हुए उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया गया फिर साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने उन पर बड़ा दांव खेला और उन्हें रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से अपना प्रत्याशी घोषित किया। इस चुनाव में उन्होंने शानदार जीत दर्ज की और देश की संसद में पहुँचने वाली जशपुर जिले की पहली महिला बनकर एक नया इतिहास रच दिया।

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दिल्ली के गलियारों में बतौर सांसद उन्होंने छत्तीसगढ़ और खासकर अपने आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं—जैसे सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य—को पूरी प्रखरता के साथ उठाया और केंद्र की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारा।

2023 का वह ऐतिहासिक और रोमांचक चुनावी मुकाबला

साल 2023 में जब छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन की बयार चल रही थी, तब पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के आदेश पर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति से राज्य की राजनीति की ओर रुख किया। भाजपा ने उन्हें पत्थलगांव (अजजा) निर्वाचन क्षेत्र से विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा। साल 2023 का पत्थलगांव विधानसभा चुनाव सूबे के सबसे दिलचस्प और कड़े मुकाबलों में से एक बन गया। इस सीट पर जनता ने भारी उत्साह दिखाते हुए 79.12 प्रतिशत का बंपर मतदान किया, जहाँ कुल 2,26,859 मतदाताओं में से 1,79,480 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

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इस चुनावी रण में मुख्य मुकाबला भाजपा की गोमती साय और कांग्रेस के बेहद कद्दावर व कई बार के विधायक रहे दिग्गज नेता राम पुकार सिंह ठाकुर के बीच था। मतगणना के आखिरी दौर तक सांसें थाम देने वाले इस बेहद रोमांचक मुकाबले में गोमती साय को कुल 82,320 मत (45.87%) हासिल हुए, जबकि उनके प्रतिद्वंदी राम पुकार सिंह को 82,065 मत (45.72%) मिले। उन्होंने महज 255 वोटों के बेहद करीबी लेकिन ऐतिहासिक अंतर से कांग्रेस के इस मजबूत गढ़ को ढहाकर पत्थलगांव में कमल खिला दिया।

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विधानसभा में धमक और राज्यमंत्री का दर्जा

पहली बार विधायक बनने के बाद विधानसभा के भीतर उनकी प्रशासनिक सूझबूझ और वरिष्ठता को पूरा सम्मान मिला। साल 2024 में उन्हें संसदीय कामकाज की कई महत्वपूर्ण समितियों का जिम्मा सौंपा गया, जिसमें वे ‘पटल पर रखे गए पत्रों का परीक्षण करने संबंधी समिति’ की सभापति चुनी गईं। इसके साथ ही उन्हें ‘सामान्य प्रयोजन समिति’ और ‘अजा, अजजा तथा अन्य पिछड़ा वर्गों के कल्याण संबंधी समिति’ के सदस्य के रूप में भी शामिल किया गया।

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संगठन और सरकार में उनके निरंतर बढ़ते कद और जशपुर-सरगुजा अंचल में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी से नवाजा। वर्तमान में वे सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएँ दे रही हैं, जिसे राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त है।

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आज वे इस गरिमामयी पद पर आसीन होकर पूरे सरगुजा संभाग और जशपुर अंचल के समग्र विकास, बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाएँ पहुँचाने के लिए पूरी शिद्दत से काम कर रही हैं। एक जनप्रिय नेता के रूप में उनका यह सफरनामा छत्तीसगढ़ की सियासत में लगातार नए आयाम गढ़ रहा है।

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