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रायपुर:
छत्तीसगढ़ में यात्री बसों का किराया बढ़ाने की मांग पर परिवहन विभाग जल्द ही कोई बड़ा फैसला ले सकता है। रायपुर में परिवहन विभाग और बस संचालकों के बीच हुई एक अहम बैठक में इस पर विस्तृत चर्चा हुई। विभाग ने सभी संचालकों से बारी-बारी से बात कर बस संचालन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों की जानकारी ली।
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डीजल की कीमतों से किराया जोड़ने की मांग
बैठक के दौरान बस संचालकों ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा आखिरी बार किराया वृद्धि वर्ष 2021 में की गई थी। इसके बाद से डीजल के दामों में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जिससे बस संचालन का खर्च काफी बढ़ गया है। संचालकों ने मांग रखी है कि यात्री किराए को डीजल की कीमतों से जोड़ने के लिए एक स्थायी कानून बनाया जाए, ताकि डीजल के दाम घटने या बढ़ने पर किराया अपने आप तय हो सके। इस पर परिवहन विभाग ने कहा कि अन्य राज्यों के किराया दरों का तुलनात्मक अध्ययन करने के बाद जल्द ही नई दरों पर निर्णय लिया जाएगा।
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ऑल इंडिया परमिट के दुरुपयोग पर होगी सख्त कार्रवाई
बैठक में ‘अखिल भारतीय पर्यटक परमिट’ (All India Tourist Permit) के नियमों के उल्लंघन का मुद्दा भी उठा। परिवहन विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी संचालक द्वारा अखिल भारतीय पर्यटक परमिट वाली बस का संचालन ‘स्टेज कैरिज’ (सामान्य यात्री बस) के रूप में किया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यात्री सुरक्षा और सुविधा के लिए 10 अनिवार्य निर्देश
परिवहन विभाग ने साफ किया है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। बैठक में सभी बस संचालकों को निम्नलिखित 10 दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा गया है:
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1. महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए सीटों का आरक्षण
प्रत्येक यात्री बस में कुल क्षमता का 25 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के लिए आरक्षित रहेगा और बस में “महिलाओं के लिए आरक्षित” का बोर्ड साफ तौर पर लगाना होगा। इसके अलावा, दिव्यांगजनों के लिए न्यूनतम 03 सीटें आरक्षित रखनी होंगी और उनके चढ़ने-उतरने की उचित सुविधा देनी होगी।
2. टिकट देना अनिवार्य और 2 वर्ष का रिकॉर्ड
हर यात्री को पूर्व-मुद्रित (Pre-printed) टिकट देना अनिवार्य होगा। टिकट के ऊपर परमिट संख्या, वाहन क्रमांक, रूट, किराया, टिकट नंबर, तिथि और परिचालक (कंडक्टर) के हस्ताक्षर होने जरूरी हैं। इस टिकट रिकॉर्ड को संचालकों को कम से कम 2 साल तक सुरक्षित रखना होगा।
3. स्टाफ के लिए यूनिफॉर्म और पहचान-पत्र
बसों के सभी ड्राइवरों और कंडक्टरों के लिए यूनिफॉर्म पहनना और पहचान-पत्र (ID Card) रखना अनिवार्य होगा। आईडी कार्ड पर नाम, पता, फोटो, ड्राइविंग लाइसेंस और बैज नंबर के साथ परमिट की वैधता लिखी होनी चाहिए।
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4. वाहन पर जरूरी जानकारियों का प्रदर्शन
बस के बाहरी हिस्से पर मालिक का नाम, मोबाइल नंबर, परमिट की वैधता, रूट और पुलिस व परिवहन हेल्पलाइन नंबर साफ लिखे होने चाहिए। बस के अंदर भी ड्राइवर-कंडक्टर की जानकारी और हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करना होगा।
5. आपातकालीन निकास और अग्नि सुरक्षा
सभी यात्री बसों, स्लीपर कोच और स्कूल बसों में आपातकालीन द्वार (Emergency Exit), खिड़कियां, अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) और फर्स्ट एड बॉक्स चालू हालत में होने चाहिए। अतिरिक्त सीट या अवैध पार्टिशन लगाकर आपातकालीन रास्ते को रोकना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
6. फायर अलार्म और सप्रेशन सिस्टम (FDSS)
तय मानकों (AIS-119, AIS-063 और AIS-135) के अनुसार, लागू श्रेणियों के सभी वाहनों में ‘फायर डिटेक्शन एंड अलार्म सिस्टम’ और ‘फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम’ का सही तरीके से काम करना अनिवार्य होगा।
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7. अवैध बॉडी मॉडिफिकेशन पर रोक
सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना किसी भी बस में अवैध बॉडी मॉडिफिकेशन, चेसिस को बड़ा करना (Extension) या अनाधिकृत रूप से सीटों के ढांचे में बदलाव करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
8. परमिट की शर्तों का कड़ाई से पालन
सभी बस संचालकों को उनके लिए निर्धारित रूट, स्वीकृत समय-सारणी (Time Table), यात्री क्षमता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह से पालन करना होगा।
9. सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का पालन
सड़क सुरक्षा, यात्री सुरक्षा और बसों में आग लगने जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सर्वोच्च न्यायालय और मानवाधिकार आयोग द्वारा जारी गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।
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10. नियमों के उल्लंघन पर होगी कड़ी कानूनी कार्रवाई
यदि कोई भी बस संचालक इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो मोटरयान अधिनियम 1988 और मोटरयान नियम 1994 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अंतर्गत बस का फिटनेस सर्टिफिकेट सस्पेंड करना, परमिट व लाइसेंस निरस्त करना, गाड़ी जब्त करना और कानूनी मुकदमा चलाना शामिल है।
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