नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में कक्षा 7, 8 और 9 में अध्ययनरत वे छात्र जिन्होंने तीन-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं का चयन कर रखा है, उन्हें अपनी पढ़ाई के दौरान विषय बदलने की जरूरत नहीं होगी। वे कक्षा 10 तक उसी भाषा संयोजन के साथ अपनी पढ़ाई जारी रख सकेंगे।
मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि तीन-भाषा नीति के अंतर्गत कम से कम दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता भविष्य के छात्रों पर लागू होगी। यह नई व्यवस्था कक्षा 6 से आगामी बैचों के लिए प्रभावी की जाएगी, जबकि वर्तमान में उच्च कक्षाओं में पढ़ रहे छात्रों पर इसे पिछली तारीख से लागू नहीं किया जाएगा।
शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे नीतिगत बदलाव मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह प्रावधान पहले से मौजूद था, लेकिन स्पष्टता के अभाव में छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी। अब इस स्पष्टीकरण के बाद छात्रों की चिंता दूर हो गई है।
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सीबीएसई 10वीं बोर्ड में हर साल लगभग 24 लाख छात्र शामिल होते हैं। इनमें से केवल 30 हजार छात्र ही दो विदेशी भाषाओं का विकल्प चुनते हैं। यानी करीब 98.5 प्रतिशत छात्र पहले से ही तीन-भाषा फॉर्मूले का पालन कर रहे हैं। यह राहत विशेष रूप से उन महानगरों और शहरी क्षेत्रों के छात्रों के लिए है, जिन्होंने पहले से ही दो विदेशी भाषाओं का चयन किया था।
उल्लेखनीय है कि मई 2026 में सीबीएसई द्वारा जारी सर्कुलर के बाद विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जिसमें सत्र 2026-27 से कक्षा 9 में कम से कम दो भारतीय भाषाओं के साथ तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया था। इस मुद्दे ने तूल पकड़ा और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। हालांकि कोर्ट ने इस पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि इस राहत संबंधी औपचारिक आदेश जल्द ही जारी कर दिए जाएंगे ताकि स्कूलों और छात्रों के बीच किसी भी प्रकार का संशय न रहे।



