जब सेवा का संकल्प गहरा हो, तो दूरियां और कठिनाइयां बौनी हो जाती हैं। रविवार को विकास खंड दुलदुला का ग्राम ढारेन इसी निस्वार्थ सेवा का गवाह बना। अवसर था बाबा भगवान राम ट्रस्ट द्वारा आयोजित एक दिवसीय ‘निःशुल्क नेत्र एवं स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर’ का।
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श्रद्धा और संकल्प का संगम
शिविर का दृश्य किसी उत्सव से कम न था। सुबह 10:30 बजे जब ट्रस्ट के संस्थापक अघोरेश्वर भगवान राम जी और वर्तमान अध्यक्ष पूज्यपाद गुरूपद संभव राम जी के चित्रों के समक्ष आरती हुई, तो पूरा माहौल ‘सेवा ही परमो धर्म’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।
अंधेरे से उजाले की ओर: चक्षु अभियान
ट्रस्ट के ‘चक्षु अभियान’ ने इस सुदूर अंचल के 174 लोगों के जीवन में स्पष्टता लौटाई। नेत्र विशेषज्ञ टी.पी. कुशवाहा, सुनील एक्का और एल.पी. मांझी की टीम ने बारीकी से परीक्षण किया।
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शिविर में न केवल जांच हुई, बल्कि तत्काल प्रभाव से जरूरतमंदों को चश्मे और दवाइयां भी बांटी गईं। जिन बुजुर्गों की आंखों में मोतियाबिंद की परत जम चुकी थी, उन्हें ऑपरेशन के लिए जशपुर रेफर कर नई उम्मीद दी गई।
जब ‘कांवर’ (गेडुआ भार) में बैठकर पहुंचे मरीज
शिविर की संवेदनशीलता तब दिखाई दी जब कुछ परिजन अपने वृद्ध और अशक्त बुजुर्गों को ‘गेडुआ भार’ (कांवर) में बैठाकर कोसों दूर से पैदल चलकर ढारेन पहुंचे।
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डॉ. रुद्र कश्यप (जनरल फिजिशियन) ने ऐसे 225 मरीजों की जांच की। रक्त शर्करा (शुगर) की जांच के साथ-साथ गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लाचारों को मुफ्त दवाइयां प्रदान की गईं।

सिर्फ इलाज नहीं, राहत का स्पर्श भी
स्वस्थ शरीर के साथ-साथ ठंड से बचाव के लिए ट्रस्ट ने उदारता दिखाई। शिविर में पहुंचे निर्धन ग्रामीणों को कंबल और साड़ियां वितरित की गईं।
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इनके श्रम से सफल हुआ ‘यज्ञ’
इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में सत्येन्द्र सिंह, अखिलेश यादव और श्री सर्वेश्वरी समूह शाखा गुमला की पूरी टीम (अजय प्रसाद, संजय महापात्र व अन्य) ने दिन-रात एक कर दिया। व्यवस्था के मोर्चे पर कमल दूबे और उनकी टीम ने सुनिश्चित किया कि सुदूर गाँव से आया कोई भी व्यक्ति खाली हाथ या बिना इलाज के न लौटे।

ढारेन का यह शिविर सिर्फ एक चिकित्सा शिविर नहीं था, बल्कि उन लाचार आंखों के लिए रोशनी का पैगाम था, जो साधन और सुविधा के अभाव में अंधेरे को ही अपनी नियति मान चुके थे।
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