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नई दिल्ली | आधार कार्ड में अपनी उम्र के साथ छेड़छाड़ करने वालों पर अब गाज गिरने वाली है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने जन्मतिथि (DOB) बदलने के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए फर्जीवाड़े के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। अब खेल हो या नौकरी, उम्र कम दिखाकर फायदा उठाने वालों की खैर नहीं।
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रजिस्ट्रेशन नंबर बनेगा ‘अड़ंगा’
अक्सर लोग आधार में उम्र कम करवाने के लिए अपना पुराना जन्म प्रमाणपत्र निरस्त करवाकर नई जन्मतिथि के साथ दूसरा प्रमाणपत्र बनवा लेते थे। लेकिन अब UIDAI ने स्पष्ट कर दिया है कि:
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आधार में सुधार के लिए केवल वही जन्म प्रमाणपत्र मान्य होगा जिसकी ‘जन्म पंजीकरण संख्या’ (Registration Number) पुराने प्रमाणपत्र वाली ही हो।
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यदि कोई आवेदक नई पंजीकरण संख्या वाला एकदम नया सर्टिफिकेट लेकर आता है, तो उसका आवेदन तुरंत रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
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80% संशोधनों का चौंकाने वाला सच
आधार केंद्रों पर लगने वाली भीड़ का एक बड़ा हिस्सा जन्मतिथि बदलवाने वालों का होता है। आंकड़ों के मुताबिक, आधार अपडेट के कुल मामलों में 80 फीसदी आवेदन केवल जन्मतिथि बदलने के लिए आते हैं।
कौन कर रहा है ये हेरफेर?
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खिलाड़ी: जूनियर लेवल की प्रतियोगिताओं में बने रहने के लिए उम्र घटाना।
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नौकरी पेशा: रिटायरमेंट को टालने या नई भर्ती में शामिल होने के लिए बदलाव।
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छात्र: बार-बार हाईस्कूल की परीक्षा देने के लिए नई पहचान बनाना।
“अब आधार में बदलाव के लिए पहले वाले जन्म प्रमाणपत्र में ही संशोधन करवाना अनिवार्य होगा। अलग पंजीकरण संख्या वाले नए प्रमाणपत्र को स्वीकार नहीं किया जाएगा।” > — प्रशांत कुमार सिंह, उप महानिदेशक (UIDAI)
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क्षेत्रीय कार्यालय के चक्कर काटनी होगी अब
बता दें कि नियम पहले से ही सख्त थे, जहां एक से अधिक बार जन्मतिथि बदलने के लिए व्यक्ति को सीधे क्षेत्रीय कार्यालय (Regional Office) जाना पड़ता था। इसके बावजूद लोग ‘नया सर्टिफिकेट’ बनवाकर सिस्टम को चकमा दे देते थे। अब नए डिजिटल मिलान और पंजीकरण संख्या की अनिवार्यता से इस ‘उम्र के खेल’ पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी।
अगर आपकी जन्मतिथि में वाकई कोई गलती है, तो उसे ठीक कराने के लिए आपको अपने मूल रिकॉर्ड्स में ही सुधार करवाना होगा। नया प्रमाणपत्र बनवाना अब समाधान नहीं, बल्कि मुसीबत बन सकता है।

