बाल सुरक्षा पर सरकार का कड़ा रुख: 18 वर्ष से कम आयु में ‘सहमति’ का कोई स्थान नहीं

नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने आज लोकसभा में महिला सुरक्षा, बाल संरक्षण और दिव्यांगजनों के अधिकारों को लेकर एक ऐसी व्यापक योजना पेश की है, जो कानून की कड़ाई के साथ-साथ मानवीय संवेदनशीलता को भी दर्शाती है। केंद्रीय मंत्रियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, भारत अब एक ऐसी व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है जहाँ न्याय और सुरक्षा समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के लिए भी सुलभ होगी।

2027 में होगी देश की अगली जनगणना: दूसरे चरण में की जाएगी ‘जातिवार गणना’, सरकार ने जारी की अधिसूचना

कठोर कानून और अपराध मुक्त समाज का संकल्प

इस पूरी व्यवस्था की शुरुआत अपराधों पर कड़े प्रहार से होती है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के लागू होने के बाद अब मानव तस्करी कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक ‘संगठित अपराध’ बन गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं और बच्चों की तस्करी करने वालों के लिए कानून में अब कोई नरमी नहीं होगी। इसके साथ ही, पोक्सो (POCSO) अधिनियम के तहत यह कड़ा संदेश दिया गया है कि 18 वर्ष से कम उम्र के साथ किसी भी प्रकार का यौन कृत्य अपराध ही रहेगा; इसमें ‘सहमति’ के किसी भी तर्क को स्वीकार नहीं किया जाएगा, क्योंकि नाबालिग ऐसे निर्णयों के परिणामों को समझने में सक्षम नहीं होते।

देशभर में 723 एकलव्य मॉडल स्कूलों को मंजूरी,आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे छात्र] डिजिटल कौशल के लिए अमेज़न से मिला हाथ

पुनर्वास और स्वास्थ्य की दोहरी ढाल

कानून की सख्ती के साथ-साथ पीड़ितों को समाज की मुख्यधारा में लौटाने के लिए ‘मिशन शक्ति’ के तहत ‘शक्ति सदन’ चलाए जा रहे हैं, जो बेसहारा महिलाओं को आश्रय और प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। स्वास्थ्य के मोर्चे पर ‘आयुष्मान भारत’ और जन औषधि केंद्रों ने क्रांति ला दी है, जहाँ महिलाओं को मुफ्त इलाज और मात्र 1 रुपये में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराकर उनके स्वास्थ्य अधिकारों को सुरक्षित किया जा रहा है।

निजी स्कूलों को बड़ी राहत: अब खुद ले सकेंगे लोकल परीक्षाएं, शिक्षा विभाग ने संशोधित किया अपना आदेश!

सामाजिक बदलाव और लिंगानुपात में बड़ी जीत

इन कानूनी प्रयासों का सबसे बड़ा प्रभाव समाज की सोच पर पड़ा है। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना अब एक सरकारी नीति से बढ़कर एक ‘राष्ट्रीय आंदोलन’ बन चुकी है। इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय स्तर पर जन्म के समय लिंगानुपात 918 से बढ़कर 929 तक पहुँच गया है और सेकेंडरी स्कूलों में लड़कियों का नामांकन भी 80 प्रतिशत के पार निकल गया है। यह आंकड़े गवाही देते हैं कि देश की बेटियां अब सुरक्षित माहौल में आगे बढ़ रही हैं।

  सरकारी स्कूलों में ‘कॉन्वेंट’ जैसा लुक: छत्तीसगढ़ के 60 लाख बच्चों को मिलेगी नई यूनिफॉर्म

अब दिव्यांगजनों के द्वार तक कानूनी मदद

व्यवस्था की यह सुरक्षा अब दिव्यांगजनों तक भी विस्तार पा चुकी है। एनएएलएसए (NALSA) 2024 योजना के तहत ‘मनोन्याय’ जैसी इकाइयां गठित की गई हैं, जो मानसिक और बौद्धिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को कानूनी सहायता दे रही हैं। सरकार ने अदालतों के बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह ‘दिव्यांग-अनुकूल’ बना दिया है। डिजिटल क्षेत्र में भी 750 से अधिक कोर्ट वेबसाइट्स को दृष्टिबाधित लोगों के लिए सुलभ बनाया गया है, जिससे न्याय पाना अब शारीरिक बाधाओं पर निर्भर नहीं रहा।

 अंतरिक्ष में भारत का ‘विजय रथ’: डॉकिंग तकनीक में दुनिया का चौथा सिरमौर बना भारत, 2025 की उपलब्धियों पर इसरो की रिपोर्ट

अंत्योदय से न्यायोदय तक

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत मुफ्त राशन और जन धन योजना के जरिए सीधा लाभ पहुँचाकर सरकार ने उस आर्थिक लाचारी को खत्म करने की कोशिश की है, जो अक्सर शोषण का कारण बनती है। झारखंड के जनजातीय इलाकों से लेकर जम्मू-कश्मीर के पहाड़ों तक, मोबाइल कानूनी वैन और डोर-टू-डोर अभियान यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि न्याय का सूरज देश के हर कोने में समान रूप से चमके।

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version