छत्तीसगढ़ में महंगा जाम:  1 अप्रैल से बदल जाएंगे देसी-विदेशी और बीयर के दाम!

भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए वर्ष 2025 एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ है, जहाँ भारत ने स्पैडेक्स (SPADEX) मिशन की सफलता के साथ अंतरिक्ष में उपग्रहों को आपस में जोड़ने यानी ‘डॉकिंग’ की जटिल तकनीक हासिल कर ली है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया का चौथा ऐसा देश बन गया है जिसने अंतरिक्ष में न केवल दो उपग्रहों को जोड़ा, बल्कि उनके बीच विद्युत ऊर्जा का हस्तांतरण भी सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया। यह सफलता भविष्य में भारत के अपने ‘अंतरिक्ष स्टेशन’ के निर्माण और कक्षा में उपग्रहों की मरम्मत (In-orbit servicing) करने की दिशा में एक बहुत बड़ी छलांग है।

‘मिशन मौसम’ से बदला भारत: पूर्वानुमान की सटीकता में 40% तक का सुधार, अब रडार की जद में आया देश का 87% हिस्सा

इसरो की तकनीकी आत्मनिर्भरता का लोहा पूरी दुनिया ने तब माना जब निसार (NISAR) मिशन के तहत नासा के सबसे महंगे पेलोड को भारतीय सैटेलाइट और प्रक्षेपण यान के साथ एकीकृत कर लॉन्च किया गया। इसके साथ ही, इसरो ने अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 के जरिए अब तक के सबसे भारी उपग्रहों को लॉन्च करने का रिकॉर्ड भी बनाया। स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देते हुए इसरो ने अपना पहला 32-बिट स्वदेशी प्रोसेसर ‘विक्रम 3201’ भी विकसित कर लिया है, जो भविष्य के सभी अंतरिक्ष मिशनों में ‘मस्तिष्क’ के रूप में कार्य करेगा और विदेशों पर हमारी निर्भरता को कम करेगा।

स्मार्ट किसान-स्मार्ट खेती: 1.56 करोड़ किसानों को मोबाइल पर मिल रहा रीयल-टाइम वेदर अपडेट; IMD ने राज्य पोर्टल्स के साथ किया डेटा एकीकृत

अंतरिक्ष क्षेत्र को आम जनमानस और निजी उद्योगों के लिए खोलने की दिशा में भी सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। जहाँ एक ओर श्रीहरिकोटा में तीसरे प्रक्षेपण पैड (3rd Launch Pad) को वित्तीय मंजूरी मिली है, वहीं तमिलनाडु के कुलसेकरपट्टिनम में छोटे उपग्रहों (SSLV) के लिए एक नया समर्पित केंद्र तैयार किया जा रहा है। इसरो अब अपनी तकनीकों को निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स के साथ साझा कर रहा है। ‘न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड’ ने लगभग 100 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिससे मछुआरों के लिए संचार टर्मिनल और उन्नत लिथियम-आयन बैटरी जैसे उत्पादों का निर्माण अब निजी भारतीय कंपनियां कर सकेंगी।

SC छात्रों के लिए बड़ी सौगात: विदेश में पढ़ाई के लिए अब मिलेगा 40 लाख तक का लोन

वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका एक ‘नेतृत्वकर्ता’ के रूप में उभरी है। इसरो न केवल जापान के साथ संयुक्त चंद्र मिशन और शुक्र मिशन पर काम कर रहा है, बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी दुनिया की मदद कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय आपदा चार्टर के माध्यम से हजारों सैटेलाइट डेटासेट साझा किए हैं, जिससे वैश्विक स्तर पर मानवीय संकटों और प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन में बड़ी मदद मिली है। भारत की यह प्रगति यह स्पष्ट करती है कि वह न केवल अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी है, बल्कि अपनी तकनीक का उपयोग सामाजिक कल्याण और वैश्विक सहयोग के लिए करने को भी प्रतिबद्ध है।

बदले की आग में इंसानियत शर्मसार, सहेली की हत्या में दो आरोपी महिलाएं पकड़ी गईं

Share.

About Us

CG NOW एक भरोसेमंद और निष्पक्ष न्यूज़ प्लेटफॉर्म है, जो आपको छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया भर की ताज़ा, सटीक और तथ्य-आधारित खबरें प्रदान करता है। हमारी प्राथमिकता है जनता तक सही और निष्पक्ष जानकारी पहुँचाना, ताकि वे हर पहलू से जागरूक और अपडेटेड रहें।

Contact Us

Syed Sameer Irfan
📞 Phone: 94255 20244
📧 Email: sameerirfan2009@gmail.com
📍 Office Address: 88A, Street 5 Vivekanand Nagar, Bhilai 490023
📧 Email Address: cgnow.in@gmail.com
📞 Phone Number: 94255 20244

© 2025 cgnow.in. Designed by Nimble Technology.

error: Content is protected !!
Exit mobile version