तेहरान/वाशिंगटन | 28 फरवरी 2026
पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने शनिवार को एक बेहद खतरनाक मोड़ ले लिया जब अमेरिका और इस्राइल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला किया। इस्राइली रक्षा बलों ने दावा किया है कि उन्होंने अपने इतिहास के सबसे बड़े हवाई अभियान के तहत लगभग 200 लड़ाकू विमानों का उपयोग कर ईरान के 500 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस भीषण गोलाबारी में अब तक 201 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि सैकड़ों अन्य घायल हैं।
ईरान की रेड क्रीसेंट सोसाइटी के अनुसार, इन हमलों ने देश के 24 प्रांतों को बुरी तरह प्रभावित किया है। मलबे के नीचे दबे लोगों को निकालने के लिए 220 से अधिक बचाव टीमें युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। तेहरान और तबरीज़ जैसे प्रमुख क्षेत्रों में मिसाइल लॉन्चर और एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुँचा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस अभियान को ‘मुख्य युद्ध कार्रवाई’ घोषित करते हुए ईरानी सुरक्षा बलों को हथियार डालने की चेतावनी दी है। उन्होंने ईरानी नागरिकों को घरों के भीतर रहने की सलाह देते हुए स्पष्ट किया कि इस सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की परमाणु, मिसाइल और नौसैनिक क्षमता को पूरी तरह से समाप्त करना है ताकि अमेरिकी हितों की रक्षा की जा सके।
इस अचानक हुई कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज कर दी है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि फ्रांस को इस हमले की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी और उन्होंने संकट के समाधान के लिए सैन्य विकल्प के बजाय कूटनीति पर जोर दिया। वहीं, वेनेजुएला ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताया है। तुर्किये ने तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की है, जबकि भारत ने दोनों पक्षों से अत्यधिक संयम बरतने और बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है।
जवाब में ईरान ने भी क्षेत्र में मौजूद कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं, जिससे स्थिति और अधिक अनिश्चित हो गई है। इस्राइली वायुसेना का दावा है कि उनके हमलों ने ईरान की रक्षा पंक्ति को गंभीर रूप से तोड़ दिया है और उन्हें अब हवाई बढ़त हासिल है। वर्तमान परिस्थितियां एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर इशारा कर रही हैं, जिसने पूरी दुनिया की चिंताएं बढ़ा दी हैं।

