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रायपुर, 13 मार्च 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था को आधुनिक, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
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वर्ष 2026-27 के बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 22 हजार 466 करोड़ रुपये का भारी-भरकम प्रावधान किया गया है।
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विधानसभा में बजट भाषण के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि यह निवेश केवल भवनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य के हर बच्चे को बेहतर अवसर और डिजिटल युग के लिए तैयार करने की एक बड़ी पहल है।
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बजट की सबसे बड़ी घोषणा प्रदेश के युवाओं के लिए 5,000 शिक्षकीय पदों पर सीधी भर्ती और 4,000 से अधिक पदों पर पदोन्नति की है। मंत्री यादव के अनुसार, इन भर्तियों के लिए परीक्षा अक्टूबर और नवंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।
इसके साथ ही, केंद्र की पीएम श्री योजना के तहत 250 करोड़ रुपये के निवेश से स्कूलों को स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, आधुनिक लैब और होलिस्टिक रिपोर्ट कार्ड जैसी वैश्विक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को उच्च स्तरीय शिक्षा देने हेतु 100 करोड़ की लागत से 150 स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे।
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बस्तर और सुदूर वनांचल क्षेत्रों जैसे ओरछा (अबुझमाड़), नारायणपुर और जगरगुंडा (सुकमा) में शिक्षा की मुख्यधारा जोड़ने के लिए ‘एजुकेशन सिटी’ की स्थापना हेतु 9 करोड़ 50 लाख रुपये का विशेष प्रावधान किया गया है। अधोसंरचना को मजबूती देने के लिए 105 करोड़ 20 लाख रुपये से 700 नए स्कूल भवनों (प्राथमिक से हायर सेकेंडरी तक) का निर्माण और पुराने भवनों का जीर्णोद्धार होगा।
प्रशासनिक कार्यों को एक ही छत के नीचे लाने के लिए नवा रायपुर में एक आधुनिक प्रशासनिक कॉम्पोजिट भवन बनाया जाएगा, जिसमें माध्यमिक शिक्षा मंडल और समग्र शिक्षा जैसे सभी महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित होंगे।
छात्रों के सर्वांगीण विकास और तकनीक पर जोर देते हुए बजट में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण के तहत 30 लाख बच्चों को मध्यान्ह भोजन देने के लिए 700 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में क्यूआर कोड आधारित मार्कशीट, ऑनलाइन ट्रांसफर सर्टिफिकेट और पीएम ई-विद्या के तहत डीटीएच चैनलों से 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अलावा, स्वामी आत्मानंद विद्यालयों के लिए 800 करोड़, निशुल्क साइकिल योजना के लिए 66 करोड़ और छात्रवृत्ति के लिए 236 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
खेलकूद को अनिवार्य बनाने और सेना में अग्निवीर बनने के लिए शारीरिक प्रशिक्षण की पहल छात्रों के भविष्य को नई दिशा देगी।

