रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज एक दुर्लभ नज़ारा देखने को मिलेगा, जहाँ विपक्ष के साथ-साथ सत्तापक्ष के विधायक भी अपनी ही सरकार के मंत्रियों को कटघरे में खड़ा करेंगे। आज की कार्यसूची में शामिल 77 ध्यानाकर्षण सूचनाओं और संकल्पों ने यह साफ कर दिया है कि जनहित के मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस के विधायक एक ही सुर में अपनी आवाज बुलंद करने वाले हैं।
कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर अपनों का प्रहार
सदन में आज सबसे दिलचस्प स्थिति तब होगी जब भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक प्रदेश में बढ़ती चाकूबाजी और गिरती कानून-व्यवस्था पर गृह मंत्री का ध्यान आकर्षित करेंगे। सत्तापक्ष के इन कद्दावर नेताओं द्वारा अपनी ही सरकार से सवाल पूछना मंत्रियों के लिए अग्निपरीक्षा जैसा होगा। वहीं, गौठान योजना में व्याप्त अनियमितताओं और पशुधन विकास विभाग की खामियों पर भी भाजपा सदस्यों के तीखे बाण आज सदन की गर्मी बढ़ाएंगे।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत आज शिक्षा नीति और किसानों के मुआवजे पर सरकार को घेरेंगे,
कांग्रेस का चौतरफा हमला: मुआवजा और शिक्षा के मुद्दे
दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक दल आज मुआवजे और शिक्षा के मुद्दे पर सरकार की घेराबंदी करेगा। डॉ. महंत पेंड्रा बायपास मार्ग निर्माण से प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा न मिलने और स्वामी आत्मानंद स्कूलों से पदमुक्त किए गए कर्मचारियों का मुद्दा प्रमुखता से उठाएंगे। कांग्रेस आज स्वास्थ्य विभाग में नकली दवाओं की आपूर्ति और डॉक्टरों की कमी पर भी स्वास्थ्य मंत्री से जवाब माँगेगी।
स्वास्थ्य और अवैध उत्खनन पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य और राजस्व के कुछ मुद्दों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायक एक जैसे सवाल पूछ रहे हैं। भाजपा विधायक राजेश मूणत जहाँ जमीन रिकॉर्ड और गृह निर्माण मंडल की गड़बड़ियों पर सवाल उठाएंगे, वहीं कांग्रेस के देवेन्द्र यादव अस्पतालों में अमानक दवाइयों की सप्लाई पर हल्ला बोलेंगे। रायगढ़ और गरियाबंद में हो रहे अवैध रेत उत्खनन और हाथी प्रभावित क्षेत्रों में बिजली कटौती के मुद्दे पर भी दोनों पक्षों के विधायकों ने अपनी-अपनी तैयारी कर ली है।
बेरोजगारों के लिए उठी एक साथ आवाज
आज सदन में रिक्त पदों पर विशेष भर्ती अभियान चलाने का जो संकल्प आएगा, उसे लेकर भी सत्तापक्ष और विपक्ष के कई युवा विधायक एक मत नजर आ रहे हैं। मंत्रियों के लिए आज का दिन काफी चुनौतीपूर्ण होगा क्योंकि उन्हें न केवल विपक्ष के 77 सवालों का जवाब देना है, बल्कि अपनी ही पार्टी के विधायकों की नाराजगी और उनके द्वारा उठाए गए जमीनी मुद्दों का भी सामना करना है।
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