सुप्रीम कोर्ट के 1सितंबर 2025 को पारित आदेश से पूरे देश में सेवारत शिक्षको को 2 वर्ष के भीतर टीईटी पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता से शिक्षको में भारी आक्रोश और भविष्य की अनिश्चितता व्याप्त है।
इस मुद्दे को लेकर छत्तीसगढ़ हेडमास्टर फेडरेशन जो प्रदेश में प्रधान पाठको का सशक्त संगठन है के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन ने विरोध का बिगुल फूंक दिया है।प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन का कहना है की न्यायपालिका के निर्णय का पूरा सम्मान है लेकिन 20/25 वर्ष से सेवा दे रहे शिक्षको को पात्रता की अग्निपरीक्षा में झोकना कहां का न्याय है।
सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय शिक्षा के अधिकार कानून और इसके लागू होने के बाद नियुक्त होने वाले शिक्षको के संदर्भ में है लेकिन माननीय कोर्ट में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अध्यापक परिषद द्वारा शिक्षको का पक्ष सही तरीके से न रखे जाने के कारण आरटीई लागू होने के पहले से नियुक्त शिक्षको पर भी जबरदस्ती थोपा जा रहा है।सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के पश्चात भी 6 माह बीत चुके है लेकिन न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार द्वारा इस निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर न किया जाना संदेह पैदा करता है।
पूरे देश के शिक्षक इसका विरोध भी कर रहे है लेकिन अपनी गलती छुपाने के लिए राज्य सरकारों द्वारा शिक्षको को टीईटी उत्तीर्ण करने हेतु दबाव बनाया जा रहा है।तमिलनाडु,मध्यप्रदेश,हरियाणा,बिहार,तेलंगाना जैसे राज्यों में सेवारत शिक्षको को टीईटी परीक्षा दिलाने अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का आदेश जारी किया जा चुका है।
छत्तीसगढ़ राज्य में कल ही विधानसभा के पटल पर इस विषय पर शिक्षामंत्री जी का बयान आया की प्रदेश में 80 हजार शिक्षक टीईटी पात्रता नही रखते।मंत्री जी ने यह भी स्पष्ट किया की सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिपालन में विभाग आवश्यक कार्रवाई करेगी।मतलब साफ है हमारे प्रदेश की सरकार टीईटी के मुद्दे पर शिक्षको को कोई राहत नहीं देना चाहती और आने वाले समय में प्रदेश में सेवारत शिक्षको को भी टीईटी परीक्षा दिलानी पड़ेगी।
हेडमास्टर फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश सिंह बिसेन का स्पष्ट कहना है की हमारी प्राथमिकता NO TET, BEFORE RTE ACT है।आरटीई अधिनियम लागू होने के पूर्व नियुक्त शिक्षको को टीईटी परीक्षा से पूर्णतः छूट मिले इसके लिए संगठन सड़क की लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध है।शिक्षको के लंबे समय तक किए कार्य,अनुभव को नकार कर एक परीक्षा की तराजू में तौला नही जा सकता।
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कमलेश सिंह बिसेन ने बताया की अखिल भारतीय शिक्षक फेडरेशन के आह्वान पर आगामी 4अप्रैल को रामलीला मैदान दिल्ली में होने वाली रैली को संगठन का पूरा समर्थन है।आगामी 15 मार्च को होने वाली प्रदेश स्तरीय शिक्षक संगठनों की बैठक में शामिल होकर टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के बैनर तले प्रदेश के सभी शिक्षक संगठन मिलकर टीईटी अनिवार्यता के काले कानून का पुरजोर विरोध करेंगे।
हमारा संगठन अपने सभी प्रदेश पदाधिकारियों,जिला,ब्लॉक पदाधिकारियों से बैठक में शामिल होने की अपील करता है।प्रदेश में 80 हजार नॉन टीईटी सेवारत शिक्षको को विश्वास दिलाते है की किसी का अहित नहीं होने दिया जाएगा।आर पार की लड़ाई में सभी शिक्षक साथी अपना सर्वस्व समर्पित करके विजय होंगे इसमें कोई संदेह नहीं रखे।

