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रायपुर | 25 मार्च 2026
छत्तीसगढ़ की छठवीं विधानसभा के सदस्यों द्वारा पूछे गए सवालों का पूरा लेखा-जोखा सामने आ चुका है। इन आंकड़ों ने कई दिग्गजों की सक्रियता पर मुहर लगाई है, तो कई माननीयों की ‘चुप्पी’ ने सबको हैरान कर दिया है। जहाँ विपक्ष और कुछ सत्तापक्ष के विधायक सदन में सवालों की बौछार कर रहे हैं, वहीं मंत्रियों और विधानसभा अध्यक्ष की अपनी संवैधानिक मर्यादा के कारण सक्रियता शून्य रही है। कुल 6,732 सवालों के इस महाकुंभ में कुछ चेहरों ने सदन की कार्यवाही में जान फूंक दी। आइए देखते हैं सदन के ‘टॉप परफॉर्मर्स’ और ‘बैकबेंचर्स’ की पूरी कुंडली।
टॉप 10: सदन के ‘सुपर-सक्रिय’ विधायक
ये वो माननीय हैं जिन्होंने जनता के मुद्दों पर सबसे ज्यादा सवाल दागे। 200 का जादुई आंकड़ा छूने वाले विधायकों की संख्या भी कम नहीं है।
| स्थान | माननीय सदस्य का नाम | कुल प्रश्न (योग) |
| 1 | श्री पुन्नूलाल मोहले | 200 |
| 2 | श्री धरमलाल कौशिक | 200 |
| 3 | श्री सुशांत शुक्ला | 200 |
| 4 | श्री भोलाराम साहू | 200 |
| 5 | श्रीमती भावना बोहरा | 200 |
| 6 | श्री अजय चंद्राकर | 200 |
| 7 | श्री धर्मजीत सिंह | 196 |
| 8 | श्री बालेश्वर साहू | 196 |
| 9 | श्रीमती अंबिका मरकाम | 196 |
| 10 | श्री दलेश्वर साहू | 196 |
छत्तीसगढ़ विधानसभा के आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जो काम विपक्ष को करना चाहिए था, उस मोर्चे पर सत्तापक्ष (BJP) के विधायक सबसे ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं। सदन के ‘टॉप 10’ परफॉर्मर्स की सूची पर नजर डालें तो इसमें सत्ताधारी दल के विधायकों का बोलबाला है। यह इस बात का संकेत है कि अपनी ही सरकार होने के बावजूद विधायक अपने क्षेत्र की समस्याओं को लेकर बेहद मुखर हैं।
सुशांत शुक्ला और भावना बोहरा जैसे नए विधायकों ने साबित कर दिया है कि वे केवल सदन की शोभा बढ़ाने नहीं, बल्कि जनता की आवाज बनने आए हैं। उन्होंने 200 सवालों का आंकड़ा छूकर वरिष्ठ नेताओं को भी पीछे छोड़ दिया है। सत्तापक्ष के विधायकों द्वारा इतनी बड़ी संख्या में प्रश्न पूछना यह दर्शाता है कि वे अपनी ही सरकार के कामकाज की निगरानी कर रहे हैं और विकास कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। अजय चंद्राकर और धरमलाल कौशिक जैसे वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी यह सुनिश्चित करती है कि सदन में तर्कपूर्ण चर्चा हो, भले ही जवाब अपनी ही सरकार के मंत्रियों को देना पड़े।

ऊपर दिए गए आंकड़ों से स्पष्ट है कि टॉप 5 में सभी BJP विधायक हैं। यह ट्रेंड छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक नई परंपरा की शुरुआत है, जहाँ विधायक दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जवाबदेही तय कर रहे हैं। 196 का स्कोर करने वाले धर्मजीत सिंह और बालेश्वर साहू भी इसी दौड़ में कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।
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सदन के ‘बैकबेंचर्स’: विधानसभा में इन 10 माननीयों की ‘खामोशी’ ने सबको चौंकाया!
छत्तीसगढ़ विधानसभा के आंकड़ों का दूसरा पहलू उन विधायकों की तरफ इशारा करता है, जिनका रिपोर्ट कार्ड सवालों के मामले में काफी खाली नजर आ रहा है। जहाँ सत्तापक्ष के कुछ विधायक 200 का आंकड़ा छू रहे हैं, वहीं सदन में ऐसे भी माननीय हैं जिन्होंने पूरे सत्रों के दौरान दहाई (10) का आंकड़ा भी मुश्किल से पार किया है या उसके आसपास ही सिमट गए।
इन ‘बॉटम 10’ नामों में पूर्व मंत्री, दिग्गज आदिवासी नेता और कुछ नए चेहरे भी शामिल हैं, जिनकी सक्रियता पर अब सवाल उठने लगे हैं। इन विधायकों ने सदन में उपस्थिति तो दर्ज कराई, लेकिन सवालों के मामले में इनका हाथ थोड़ा तंग रहा।
| स्थान | माननीय सदस्य का नाम | कुल प्रश्न (योग) |
| 1 | श्री नीलकंठ टेकाम | 7 |
| 2 | श्री विक्रम उसेण्डी | 8 |
| 3 | श्री ईश्वर साहू | 16 |
| 4 | श्री गजेन्द्र यादव (मंत्री) | 17 |
| 5 | श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा | 21 |
| 6 | श्री विनायक गोयल | 24 |
| 7 | श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा | 31 |
| 8 | श्री चौतराम अटामी | 40 |
| 9 | श्री प्रेमचंद पटेल | 42 |
| 10 | श्री गुरु खुशवंत साहेब (मंत्री) | 42 |
गजेन्द्र यादव और गुरु खुशवंत साहेब जैसे नाम इस सूची में इसलिए हैं क्योंकि मंत्री पद की शपथ लेने के बाद वे प्रश्न पूछने के पात्र नहीं रह जाते, बल्कि उन्हें जवाब देना होता है। इनके जो भी प्रश्न रिकॉर्ड में हैं, वे मंत्री बनने से पहले के हैं। विक्रम उसेण्डी और नीलकंठ टेकाम जैसे अनुभवी नामों का इस सूची में सबसे नीचे होना हैरान करने वाला है।

पूर्व आईएएस होने के नाते नीलकंठ टेकाम से नीतिगत सवालों की उम्मीद थी, लेकिन मात्र 7 प्रश्नों के साथ वे पूरी विधानसभा में सबसे नीचे पायदान पर रहे। ईश्वर साहू जैसे नए विधायकों के लिए सदन की प्रक्रिया को समझना और वहां अपनी आवाज उठाना अभी भी एक चुनौती बना हुआ है। 16 प्रश्नों के साथ उनका प्रदर्शन भी काफी धीमा रहा है। संभव है कि ये विधायक अपने क्षेत्रों में विकास कार्यों में व्यस्त रहे हों, लेकिन सदन के पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में ये काफी पीछे छूट गए।
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इस सूची में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के नाम हैं, जो नियमों के तहत प्रश्न पूछने के बजाय जवाब देने के लिए उत्तरदायी होते हैं।
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श्री विष्णु देव साय (मुख्यमंत्री)
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श्री अरुण साव (उप मुख्यमंत्री)
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श्री विजय शर्मा (उप मुख्यमंत्री)
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डॉ. रमन सिंह (विधानसभा अध्यक्ष)
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श्री रामविचार नेताम (मंत्री)
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श्री केदार कश्यप (मंत्री)
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श्री ओ.पी. चौधरी (मंत्री)
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श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े (मंत्री)
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श्री दयालदास बघेल (मंत्री)
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इन आंकड़ों में एक बड़ी फेहरिस्त उन माननीयों की भी है, जिनका प्रश्न स्कोर कार्ड ‘शून्य’ रहा है। हालांकि, इस खामोशी के पीछे संवैधानिक मर्यादाएं और प्रोटोकॉल एक बड़ी वजह हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और विजय शर्मा के साथ-साथ कैबिनेट के वरिष्ठ मंत्रियों जैसे रामविचार नेताम, केदार कश्यप और ओ.पी. चौधरी का नाम इस सूची में शामिल है। नियमतः, सरकार के अंग होने के नाते ये माननीय प्रश्न पूछने के बजाय सदन में जवाब देने के लिए उत्तरदायी होते हैं, इसलिए इनका सक्रियता स्तर शून्य दिखाई देता है।
वहीं, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह भी सदन के संरक्षक की भूमिका में होने के कारण सवालों की प्रक्रिया से बाहर रहते हैं। लेकिन, असली चर्चा उन अनुभवी विधायकों की है जो न तो मंत्री हैं और न ही किसी संवैधानिक पद पर, फिर भी सदन के पटल पर उनकी आवाज उम्मीद के मुताबिक नहीं गूंजी। विपक्ष के कुछ वरिष्ठ नेताओं का भी इस फेहरिस्त में कम सक्रिय होना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या सदन की रणनीतियां अब केवल चंद चेहरों के इर्द-गिर्द ही सिमट कर रह गई हैं?
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छत्तीसगढ़ विधानसभा के आंकड़ों का सत्रवार विश्लेषण करने पर कई चौंकाने वाली और सकारात्मक तस्वीरें उभरकर सामने आई हैं। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि सदन के भीतर विधायकों की आक्रामकता लगातार बढ़ रही है। जहां साल 2024 के शुरुआती सत्रों में प्रति बैठक औसतन केवल 128 सवाल पूछे जा रहे थे, वहीं 2026 तक आते-आते यह आंकड़ा बढ़कर 209 सवाल प्रति बैठक तक जा पहुँचा है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि माननीय विधायक अब जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
इस पूरे विश्लेषण में दिसम्बर 2025 का सत्र एक बड़ा ‘सस्पेंस’ बनकर उभरा है। गौर करने वाली बात यह है कि इस सत्र में केवल 3 बैठकें निर्धारित थीं, लेकिन औसत सवालों के मामले में यह सत्र सबसे ऊपर रहा। इसका सीधा मतलब यह है कि समय कम होने के बावजूद विधायकों ने रिकॉर्ड तोड़ सवाल पूछकर सरकार और विभाग के अधिकारियों को पसीने ला दिए। सदन की यह सक्रियता बताती है कि अब विधायक केवल उपस्थिति दर्ज कराने नहीं, बल्कि ठोस सवाल पूछने के लिए विधानसभा पहुँच रहे हैं।
साल 2026 का फरवरी-मार्च सत्र अब तक का सबसे बड़ा ‘धमाका’ साबित हुआ है। इस सत्र में कुल 2,924 सवालों की बौछार हुई, जो इसे अब तक का सबसे ‘हैवीवेट’ सत्र बनाता है। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि विधानसभा अब पूरी तरह से ‘एक्शन मोड’ में आ चुकी है और सदन में नए और पुराने दोनों तरह के विधायक संसदीय कार्यवाही के माहिर खिलाड़ी बन चुके हैं।

सत्रवार बढ़ते ये आंकड़े इस बात का पुख्ता सबूत हैं कि सोशल मीडिया के इस दौर में विधायकों पर जनता का भारी दबाव है। आज के समय में हर क्षेत्र की जनता अपने प्रतिनिधि की सक्रियता पर पैनी नजर रखती है। विधायकों को इस बात का भली-भांति अहसास है कि यदि वे सदन के पटल पर जनता की समस्याओं को मजबूती से नहीं उठाएंगे, तो आने वाले समय में क्षेत्र की जनता उनका ‘रिपोर्ट कार्ड’ खराब करने में देर नहीं लगाएगी। यही कारण है कि आज विधानसभा का हर सत्र पिछले सत्र से कहीं ज्यादा आक्रामक और सवालों से भरा नजर आ रहा है।
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विधानसभा के आंकड़ों को अगर सत्र के हिसाब से देखें, तो एक बहुत ही दिलचस्प ट्रेंड निकलकर सामने आता है। सदन में केवल विधायकों की संख्या नहीं, बल्कि उनके सवालों की क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों में जबरदस्त उछाल आया है। विधानसभा के अलग-अलग सत्रों में प्रश्न पूछने की रफ्तार कैसी रही, यहाँ देखिए:
सत्रवार प्रदर्शन का विश्लेषण (Comparison Table)
| सत्र का समय | निर्धारित बैठकें | कुल प्राप्त प्रश्न | औसत (प्रति बैठक) |
| फरवरी-मार्च 2024 | 19 | 2,448 | 128.8 |
| जुलाई 2024 | 5 | 966 | 193.2 |
| दिसम्बर 2024 | 4 | 814 | 203.5 |
| फरवरी-मार्च 2025 | 16 | 2,504 | 156.5 |
| जुलाई 2025 | 5 | 996 | 199.2 |
| नवम्बर-दिसम्बर 2025 | 3 | 628 | 209.3 |
| फरवरी-मार्च 2026 | 14 | 2,924 | 208.8 |
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छत्तीसगढ़ विधानसभा: क्षेत्रवार और नामवार 90 विधायकों का रिपोर्ट कार्ड
1. श्रीमती रेणुका सिंह सरुता: पूर्व केंद्रीय मंत्री ने नवंबर-दिसंबर सत्र में अपनी सक्रियता बढ़ाई और कुल 13 प्रश्न सदन के पटल पर रखे।
2. श्री श्याम बिहारी जायसवाल: कैबिनेट मंत्री की अहम जिम्मेदारी होने के नाते वे प्रश्नकाल में जवाबदेह रहे, इसलिए उनका प्रश्न स्कोर शून्य है।
3. श्री भैया लाल राजवाड़े: बैकुंठपुर के इस अनुभवी नेता ने हर सत्र में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और क्षेत्र के 14 मुद्दों पर सवाल पूछे।
4. श्री भूलन सिंह मराबी: इस आदिवासी चेहरे ने 2025 के सत्रों में अपनी विशेष सक्रियता दिखाई और अब तक कुल 10 प्रश्न दागे हैं। 5. श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े: मंत्री पद की गरिमा और विभागीय कार्यों की व्यस्तता के कारण इन्होंने प्रश्न पूछने से दूरी बनाए रखी।
6. श्रीमती शकुंतला सिंह पोर्ते: बजट सत्र 2025 में 19 और 2026 में 16 प्रश्न पूछकर इन्होंने कुल 35 सवालों के साथ अपनी सक्रियता साबित की।
7. श्री रामविचार नेताम: कैबिनेट मंत्री होने की संवैधानिक मर्यादा के कारण इनका प्रश्न स्कोर रिकॉर्ड में शून्य दर्ज किया गया है।
8. श्रीमती उद्देश्वरी पैकरा: साल 2026 के सत्र में इन्होंने अचानक गियर बदला और 12 सवाल दागे, जिससे इनका कुल स्कोर 21 पहुँचा।
9. श्री प्रबोध मिंज: लुंड्रा विधायक हर सत्र में निरंतर सक्रिय रहे और 2026 में रिकॉर्ड 30 प्रश्नों के साथ कुल 90 का आंकड़ा छुआ।
10. श्री राजेश अग्रवाल: मंत्री बनने से पहले तक इन्होंने सदन में जमकर सवाल पूछे और कुल 43 प्रश्नों के साथ अपना योगदान दिया।
11. श्री रामकुमार टोप्पो: सीतापुर से आए इस नए विधायक ने 2026 में 41 प्रश्न पूछकर अपनी आक्रामकता दिखाई और 115 का स्कोर बनाया।
12. श्रीमती रायमुनी भगत: जशपुर विधायक शुरुआती सत्र में 42 प्रश्न पूछकर चर्चा में रहीं और कुल 59 प्रश्नों के साथ सक्रियता बनाए रखी।
13. श्री विष्णु देव साय: सूबे के मुख्यमंत्री होने के नाते पूरी सरकार की ओर से जवाब देने की जिम्मेदारी इन्हीं पर है, अतः प्रश्न स्कोर शून्य है।
14. श्रीमती गोमती साय: पूर्व सांसद ने विधानसभा में भी अपना दबदबा कायम रखा और 2026 में 37 प्रश्नों के साथ कुल 113 का आंकड़ा पार किया।
15. श्रीमती विद्यावती सिदार: साल 2026 के सत्र में 56 प्रश्न पूछकर ये सबसे सक्रिय महिला विधायक बनीं और कुल 117 प्रश्न पूरे किए।
16. श्री ओ.पी. चौधरी: प्रदेश के वित्त मंत्री होने के कारण वे बजट और विभागीय जवाबों में व्यस्त रहे, जिससे उनका प्रश्न स्कोर शून्य रहा।
17. श्रीमती उत्तरी गणपत जांगड़े: सारंगढ़ विधायक ने निरंतरता दिखाई और हर सत्र में दोहरे अंक में सवाल पूछकर कुल 115 प्रश्न पूरे किए।
18. श्री उमेश पटेल: पूर्व मंत्री और विपक्ष के मजबूत स्तंभ के रूप में इन्होंने 156 प्रश्नों के साथ सरकार को हर मोर्चे पर घेरा।
19. श्री लालजीत सिंह राठिया: सत्र दर सत्र इनकी आक्रामकता बढ़ती गई और 165 प्रश्नों के साथ ये सदन के टॉप परफॉर्मर्स में शामिल रहे।
20. श्री फूलसिंह राठिया: साल 2026 में 31 प्रश्न पूछकर इन्होंने अपनी सक्रियता का ग्राफ तेजी से बढ़ाया और कुल 74 का आंकड़ा छुआ।
21. श्री लखन लाल देवांगन: कैबिनेट मंत्री की विभागीय जवाबदेही के कारण इन्होंने सदन में सवाल पूछने के बजाय उत्तर देने की भूमिका निभाई।
22. श्री प्रेमचंद पटेल: रायगढ़ जिले के इस विधायक ने 2026 में 24 प्रश्न पूछकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कुल 42 प्रश्न पूरे किए।
23. श्री तुलेश्वर हीरा सिंह मरकाम: गोंडवाना गणतंत्र पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते हुए इन्होंने सदन में कुल 79 महत्वपूर्ण सवाल उठाए।
24. श्री प्रणव कुमार मरपची: मरवाही विधायक ने औसत सक्रियता दिखाते हुए हर सत्र में क्षेत्र के बुनियादी मुद्दों पर कुल 49 प्रश्न पूछे। 25. श्री अटल श्रीवास्तव: बिलासपुर के इस तेजतर्रार विपक्षी नेता ने 141 प्रश्नों के साथ विकास कार्यों पर सरकार से जवाब माँगा।
26. श्री अरुण साव: उप मुख्यमंत्री के रूप में सदन की कार्यवाही के संचालन और जवाबों में व्यस्त रहने के कारण इनका प्रश्न स्कोर शून्य रहा।
27. श्री पुन्नूलाल मोहले: मुंगेली के इस दिग्गज ने 200 प्रश्नों के साथ विधानसभा में शिखर पुरुष का स्थान हासिल किया है।
28. श्री धर्मजीत सिंह: संसदीय ज्ञान के धनी इस नेता ने 196 प्रश्नों के साथ सदन के भीतर एक मजबूत स्तंभ की भूमिका निभाई।
29. श्री धरमलाल कौशिक: पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने अपनी वरिष्ठता के अनुरूप 200 प्रश्नों का जादुई आंकड़ा छूकर मिसाल पेश की।
30. श्री अमर अग्रवाल: बिलासपुर के इस वरिष्ठ नेता ने प्रश्न पूछने के बजाय सदन की चर्चाओं में सक्रियता दिखाई, जिससे स्कोर शून्य रहा।
31. श्री सुशांत शुक्ला: बेलतरा के इस नए विधायक ने अनुभवी दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए 200 प्रश्न पूछकर रिकॉर्ड कायम किया। 32. श्री दिलीप लहरिया: मस्तुरी विधायक 168 प्रश्नों के साथ विपक्ष की ओर से निरंतर आक्रामक रहे और क्षेत्र की आवाज बुलंद की। 33. श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह: अकलतरा विधायक ने 176 प्रश्नों के साथ खुद को सदन के सबसे सक्रिय सदस्यों की फेहरिस्त में शामिल किया।
34. श्री ब्यास कश्यप: जांजगीर-चांपा के मुद्दों को लेकर इन्होंने 160 प्रश्नों के माध्यम से सदन में अपनी मजबूत धमक बनाए रखी।
35. श्री चरण दास महंत: नेता प्रतिपक्ष ने 192 प्रश्नों के साथ न केवल विपक्ष की कमान संभाली बल्कि सरकार की जवाबदेही भी तय की।
36. श्री रामकुमार यादव: चन्द्रपुर विधायक 161 प्रश्नों के साथ गौवंश, खेती और ग्रामीण मुद्दों पर सदन में सबसे मुखर नजर आए।
37. श्री बालेश्वर साहू: जैजैपुर के इस विधायक ने 196 प्रश्नों के साथ सदन के ‘टॉप परफॉर्मर्स’ की सूची में सम्मानजनक स्थान बनाया। 38. श्रीमती शेषराज हरवंश: पामगढ़ विधायक महिला सदस्यों में अग्रणी रहीं और 189 प्रश्नों के साथ अपनी जबरदस्त सक्रियता दिखाई।
39. श्रीमती चातुरी नंद: सरायपाली विधायक ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर केंद्रित 162 प्रश्न पूछकर सदन का ध्यान अपनी ओर खींचा।
40. श्री सम्पत अग्रवाल: बसना विधायक ने 166 प्रश्नों के साथ अपने क्षेत्र की समस्याओं को सरकार के सामने मजबूती से रखा।
41. श्री द्वारिकाधीश यादव: खल्लारी विधानसभा का पक्ष रखते हुए इन्होंने कुल 175 प्रश्नों के साथ अपनी निरंतरता बरकरार रखी।
42. श्री योगेश्वर राजू सिन्हा: महासमुंद विधायक ने 2026 के सत्र में 34 प्रश्न पूछकर अपनी सक्रियता बढ़ाई और कुल 73 का स्कोर किया।
43. श्रीमती कविता प्राण लहरे: बिलाईगढ़ विधायक ने 132 प्रश्नों के साथ अनुसूचित जाति और वंचित वर्ग के मुद्दों पर अपनी बात रखी। 44. श्री संदीप साहू: कसडोल विधायक ने 167 प्रश्नों के साथ युवा नेतृत्व, रोजगार और स्थानीय विकास पर तीखे सवाल दागे।
45. श्री टंक राम वर्मा: कैबिनेट मंत्री होने की वजह से इन्होंने प्रश्नकाल के दौरान उत्तर देने का दायित्व निभाया, जिससे स्कोर शून्य रहा। 46. श्री इंद्र साव: बलौदाबाजार विधायक 185 प्रश्नों के साथ सदन के सबसे मेहनती और सक्रिय सदस्यों में से एक बनकर उभरे।
47. श्री अनुज शर्मा: कला जगत से राजनीति में आए धरसींवा विधायक ने 161 प्रश्न पूछकर अपनी विधायी सक्रियता को साबित किया। 48. श्री मोतीलाल साहू: रायपुर ग्रामीण के इस विधायक ने 167 प्रश्नों के साथ राजधानी और आसपास के ज्वलंत मुद्दों पर आवाज उठाई।
49. श्री राजेश मूणत: रायपुर पश्चिम के विधायक ने 181 प्रश्नों के साथ शहरी विकास और बुनियादी ढांचे पर सरकार को जमकर घेरा।
50. श्री पुरन्दर मिश्रा: रायपुर उत्तर विधायक ने 2026 के सत्र में 39 प्रश्न पूछकर अपनी सक्रियता बढ़ाई और कुल 63 का आंकड़ा छुआ।
51. श्री सुनील कुमार सोनी: उपचुनाव जीतने के बाद इन्होंने कम समय में ही 65 प्रश्न पूछकर सदन में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई।
52. श्री गुरु खुशवंत साहेब: मंत्री पद संभालने से पहले तक ये सदन में सक्रिय थे और उनके नाम कुल 42 प्रश्न दर्ज हुए हैं।
53. श्री इन्द्र कुमार साहू: अभनपुर विधायक ने 103 प्रश्नों के साथ अपने क्षेत्र की समस्याओं और खेती-किसानी पर ध्यान केंद्रित रखा। 54. श्री रोहित साहू: राजिम विधायक ने औसत सक्रियता दिखाते हुए अब तक कुल 66 प्रश्नों के साथ सदन में अपनी बात रखी है।
55. श्री जनक ध्रुव: बिन्द्रानवागढ़ विधायक ने आदिवासी हितों और वन अधिकारों पर कुल 78 प्रश्न पूछकर अपनी सक्रियता दिखाई। 56. श्रीमती अंबिका मरकाम: सिहावा विधायक ने 196 प्रश्नों के साथ महिला शक्ति और आदिवासी अंचल का सदन में दमदार प्रतिनिधित्व किया।
57. श्री अजय चंद्राकर: कुरुद विधायक 200 प्रश्नों के साथ सदन के सबसे तीखे, अनुभवी और सबसे ज्यादा सवाल पूछने वाले नेता रहे। 58. श्री ओंकार साहू: धमतरी विधायक ने 138 प्रश्नों के साथ अपने क्षेत्र की पुरानी मांगों को सदन के पटल पर मजबूती से रखा।
59. श्रीमती संगीता सिन्हा: संजारी-बालोद विधायक ने 166 प्रश्नों के साथ जिले के विकास और सामाजिक मुद्दों पर सरकार से जवाब माँगा।
60. श्रीमती अनिला भेंडिया: पूर्व मंत्री ने विपक्ष में रहकर 153 प्रश्न पूछकर यह दिखाया कि वे जनमुद्दों पर अब भी बेहद सक्रिय हैं।
61. श्री कुंवर सिंह निषाद: गुण्डरदेही विधायक ने 168 प्रश्नों के साथ अपनी निरंतरता बनाए रखी और किसानों के मुद्दे प्रमुखता से उठाए।
62. श्री भूपेश बघेल: पूर्व मुख्यमंत्री की सक्रियता 54 प्रश्नों तक सीमित रही, क्योंकि वे सदन की नीतिगत चर्चाओं में ज्यादा व्यस्त रहे। 63. श्री ललित चंद्राकर: पाटन और दुर्ग ग्रामीण के मुद्दों को लेकर इन्होंने 102 प्रश्नों के साथ सदन में अपनी आवाज बुलंद की।
64. श्री गजेन्द्र यादव: मंत्री बनने से पहले तक इन्होंने सदन में अपनी सक्रियता दिखाई थी, जिससे उनके नाम कुल 17 प्रश्न दर्ज हैं।
65. श्री देवेन्द्र यादव: भिलाई विधायक ने 85 प्रश्न पूछे, जिसमें 2026 के अकेले सत्र में उन्होंने 40 तीखे सवाल सरकार से किए।
66. श्री रिकेश सेन: वैशाली नगर विधायक ने 73 प्रश्नों के माध्यम से अपने शहरी क्षेत्र के विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित रखा।
67. श्री डोमनलाल कोर्सेवाड़ा: अहिवारा विधायक ने सीमित सक्रियता के बीच अब तक कुल 31 प्रश्नों के साथ अपना योगदान दिया है। 68. श्री ईश्वर साहू: साजा से अपनी नई पारी शुरू करने वाले इस विधायक ने 16 प्रश्नों के साथ सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 69. श्री दीपेश साहू: बेमेतरा विधायक ने 105 प्रश्नों के साथ जिले के कृषि और सिंचाई से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
70. श्री दयालदास बघेल: कैबिनेट मंत्री होने के कारण इन्होंने विभागीय उत्तर देने का काम किया, जिससे इनका प्रश्न स्कोर शून्य रहा।
71. श्रीमती भावना बोहरा: पंडरिया विधायक ने 200 प्रश्नों के साथ नई महिला विधायकों में एक बड़ा रिकॉर्ड कायम किया है। 72. श्री विजय शर्मा: उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री होने के कारण वे जवाब देने में व्यस्त रहे, जिससे उनका प्रश्न स्कोर शून्य दर्ज हुआ। 73. श्रीमती यशोदा निलाम्बर वर्मा: खैरागढ़ विधायक ने 186 प्रश्नों के माध्यम से नए जिले की मांगों और स्थानीय मुद्दों को मजबूती दी। 74. श्रीमती हर्षिता स्वामी बघेल: डोंगरगढ़ विधायक ने 180 प्रश्नों के साथ तीर्थाटन और क्षेत्र की अन्य समस्याओं पर सरकार को घेरा। 75. डॉ. रमन सिंह: विधानसभा अध्यक्ष के रूप में तटस्थ भूमिका निभाने के कारण वे प्रश्न पूछने की प्रक्रिया का हिस्सा नहीं रहे।
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76. श्री दलेश्वर साहू: डोंगरगांव विधायक 196 प्रश्नों के साथ राजनांदगांव जिले के सबसे सक्रिय चेहरों में से एक बनकर उभरे।
77. श्री भोलाराम साहू: खुज्जी विधायक ने 200 प्रश्नों के साथ टॉप लिस्ट में जगह बनाई और अपनी जबरदस्त सक्रियता का परिचय दिया।
78. श्री इन्द्रशाह मंडावी: मोहला-मानपुर विधायक ने 189 प्रश्नों के साथ वनांचल के आदिवासी मुद्दों पर अपनी बात प्रखरता से रखी। 79. श्री विक्रम उसेण्डी: अंतागढ़ के इस वरिष्ठ नेता की सक्रियता काफी कम रही और वे कुल 8 प्रश्नों तक ही सीमित नजर आए।
80. श्रीमती सावित्री मनोज मंडावी: भानुप्रतापपुर विधायक ने 100 प्रश्नों के साथ अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को सदन में रखा।
81. श्री आशा राम नेताम: कांकेर विधायक ने 78 प्रश्नों के माध्यम से बस्तर के प्रवेश द्वार से जुड़ी जन-समस्याओं को सदन के सामने रखा।
82. श्री नीलकंठ टेकाम: पूर्व आईएएस अधिकारी और केशकाल विधायक सदन में सबसे कम सक्रिय रहे, उनका कुल स्कोर मात्र 7 प्रश्न रहा।
83. सुश्री लता उसेण्डी: कोंडागांव विधायक ने 126 प्रश्नों के साथ बस्तर संभाग की सशक्त महिला आवाज के रूप में अपनी पहचान बनाई।
84. श्री केदार कश्यप: कैबिनेट मंत्री होने के कारण विभागीय उत्तरदायित्व संभाल रहे हैं, इसलिए इनका प्रश्न स्कोर शून्य रहा।
85. श्री बघेल लखेश्वर: बस्तर विधायक ने 164 प्रश्नों के साथ ग्रामीण अंचल के विकास और आदिवासी संस्कृति पर सवाल दागे।
86. श्री किरण देव: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने संगठनात्मक व्यस्तता के बावजूद 127 प्रश्न पूछकर अपनी विधायी सक्रियता बनाए रखी। 87. श्री विनायक गोयल: चित्रकोट विधायक ने औसत सक्रियता के साथ कुल 24 प्रश्नों के माध्यम से अपने क्षेत्र का पक्ष सदन में रखा। 88. श्री चौतराम अटामी: दंतेवाड़ा विधायक ने 40 प्रश्नों के साथ दक्षिण बस्तर के विकास और स्थानीय मांगों पर सवाल उठाए।
89. श्री विक्रम मंडावी: बीजापुर विधायक ने 139 प्रश्नों के साथ नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं की मांग सदन में रखी। 90. श्री कवासी लखमा: पूर्व मंत्री ने कोंटा विधायक के रूप में अपने चिर-परिचित अंदाज में 79 प्रश्न पूछकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है यह बढ़ती सक्रियता
छत्तीसगढ़ विधानसभा के इन सत्रवार आंकड़ों और विधायकों के रिपोर्ट कार्ड का विश्लेषण यह साफ कर देता है कि प्रदेश में संसदीय लोकतंत्र की जड़ें और गहरी हो रही हैं। सत्तापक्ष के विधायकों का अपनी ही सरकार से सवाल पूछने में सबसे आगे रहना इस बात का प्रमाण है कि विकास और जनता की समस्याओं को लेकर अब दलीय सीमाएं टूट रही हैं। नए और पुराने विधायकों के बीच बढ़ती यह ‘सकारात्मक प्रतिस्पर्धा’ न केवल सदन की गरिमा को बढ़ा रही है, बल्कि शासन-प्रशासन की जवाबदेही भी तय कर रही है।
कुल मिलाकर, 2,924 सवालों तक पहुँचा यह रिकॉर्ड केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता की उन उम्मीदों का प्रतिबिंब है, जिन्हें उनके प्रतिनिधि सदन के पटल पर रख रहे हैं। सत्र दर सत्र बढ़ती यह आक्रामकता आने वाले समय में एक अधिक पारदर्शी और जागरूक राजनीति की नींव रख रही है, जहाँ खामोशी के बजाय संवाद और सवाल ही विकास का असली पैमाना होंगे।

