भारत को वैश्विक पर्यटन हब बनाने की तैयारी: मेडिकल, एडवेंचर और ग्रामीण पर्यटन पर केंद्र का विशेष फोकस
वर्ष 2026 का फरवरी महीना आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास होने जा रहा है। इस महीने में हिंदू, मुस्लिम और ईसाई धर्म के प्रमुख त्योहार और उपवास की तिथियां एक ही समय के आसपास पड़ रही हैं, जो देश की साझा संस्कृति और सांप्रदायिक सौहार्द की एक सुंदर तस्वीर पेश करेंगी।
महाशिवरात्रि: 15 फरवरी को गूंजेगा ‘हर-हर महादेव’
इस साल शिव भक्तों के लिए महाशिवरात्रि का महापर्व 15 फरवरी (रविवार) को मनाया जाएगा। देशभर के शिवालयों में भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। मान्यता है कि इसी दिन शिव और शक्ति का मिलन हुआ था, इसलिए श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर आत्मिक शांति और लोक कल्याण की कामना करेंगे।

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रमजान: 14-15 फरवरी से शुरू होगा इबादत का महीना
इस्लामिक कैलेंडर के अनुसार, बरकतों का महीना रमजान भी इसी दौरान शुरू होने की संभावना है। चांद दिखने के आधार पर 14 या 15 फरवरी से पवित्र रोजों की शुरुआत होगी। पूरे एक महीने तक मुस्लिम समुदाय के लोग सूर्योदय से सूर्यास्त तक अन्न-जल का त्याग कर अल्लाह की इबादत करेंगे। यह महीना आत्म-संयम, दान और भाईचारे का संदेश देता है।

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ऐश वेडनेसडे: 18 फरवरी से ईसाई समुदाय की कठिन साधना
ईसाई धर्म के अनुयायियों के लिए 18 फरवरी (बुधवार) का दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन ‘ऐश वेडनेसडे’ के साथ ‘लेंट’ (Lent) की अवधि शुरू होगी। यह ईस्टर से पहले 40 दिनों के उपवास, प्रार्थना और प्रायश्चित का समय होता है। इस दौरान मसीही समाज के लोग सादगी से रहते हैं और त्याग व सेवा का मार्ग अपनाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग धर्मों के साधना पर्वों का एक ही समय पर आना समाज में शांति और परस्पर सम्मान की भावना को और मजबूत करेगा। पूरा देश इस दौरान एक अनोखी आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहेगा।
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