डिजिटल भारत 2026: हर जिले में 5G, हर पंचायत में इंटरनेट और धोखाधड़ी करने वालों पर सीधा प्रहार
जशपुरनगर: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में केंद्र सरकार द्वारा किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ शुक्रवार को जशपुर की सड़कों पर सियासी पारा चढ़ गया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को ‘गरीब विरोधी’ करार देते हुए भारी संख्या में कलेक्टर कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। हालांकि, प्रशासन की सख्त घेराबंदी और पुलिस के लगाए गए बैरिकेड्स ने प्रदर्शनकारियों का रास्ता रोक लिया, जिसके चलते कार्यकर्ताओं और पुलिस जवानों के बीच तीखी झूमा-झटकी भी देखने को मिली।

आंदोलन की शुरुआत शहर के रणजीता स्टेडियम चौक से हुई, जहाँ जिले भर से आए कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का हुजूम उमड़ा। धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश संगठन प्रभारी जरिता लेफ्तफ्लांग और जिलाध्यक्ष यूडी मिंज सहित अन्य वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि मनरेगा के नियमों में किए गए बदलावों से न केवल गरीब मजदूरों का हक मारा जा रहा है, बल्कि इससे राज्यों पर भी आर्थिक बोझ बढ़ेगा। कांग्रेस ने मांग की है कि मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 400 रुपये प्रतिदिन की जाए और काम की गारंटी सुनिश्चित की जाए।
जैसे ही धरना समाप्त कर कांग्रेसी नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय की ओर बढ़े, पुलिस प्रशासन पहले से ही मुस्तैद नजर आया। सुरक्षा के मद्देनजर कार्यालय की ओर जाने वाले सभी मार्गों को सील कर दिया गया था। स्वामी आत्मानंद स्कूल के पास जब पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोकने का प्रयास किया, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। बैरिकेड्स पार करने की जिद पर अड़े कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, लेकिन भारी संख्या में तैनात जवानों ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने नहीं दिया।

घेराव के प्रयास के बाद कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें मनरेगा के तहत जवाबदेही तय करने, तमाम नए बदलावों को तत्काल वापस लेने और मजदूरों के हितों की सुरक्षा करने की मांग की गई है। इस दौरान जिला संगठन प्रभारी भानू प्रताप सिंह, आरती सिंह और हीरू राम निकुंज सहित कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। इस आंदोलन ने जिले में मनरेगा को लेकर चल रही सियासी बहस को और तेज कर दिया है।
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