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रायपुर/नई दिल्ली: भारत सरकार की नक्सल विरोधी रणनीति का सबसे व्यापक और सकारात्मक असर छत्तीसगढ़ में देखने को मिल रहा है, जो लंबे समय से वामपंथी उग्रवाद का केंद्र रहा है। गृह मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र और राज्य के साझा प्रयासों से अब छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का प्रभाव ऐतिहासिक रूप से न्यूनतम स्तर पर पहुँच गया है। देशभर में प्रभावित जिलों की संख्या घटकर मात्र 8 रह गई है, जिनमें से छत्तीसगढ़ के सबसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी हिंसा की घटनाओं में भारी गिरावट आई है। राज्य में सुरक्षा बलों की बढ़ती सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि साल 2025 में मार गिराए गए 364 नक्सलियों में एक बड़ी संख्या छत्तीसगढ़ के जंगलों में सक्रिय कैडरों की रही है।
छत्तीसगढ़ में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए केंद्र सरकार ने विशेष बुनियादी ढांचा योजना (SIS) के तहत भारी निवेश किया है। राज्य की ‘स्पेशल फोर्स’ और ‘स्टेट इंटेलिजेंस ब्रांच’ (SIB) को आधुनिक हथियारों और तकनीक से लैस करने के लिए करोड़ों रुपये का प्रावधान किया गया है। दुर्गम क्षेत्रों में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य में अब तक सैकड़ों किलेबंद पुलिस स्टेशन (Fortified Police Stations) बनाए जा चुके हैं, जो नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशनल बेस के रूप में काम कर रहे हैं। इसके अलावा, राज्य के नक्सल प्रभावित जिलों में केंद्रीय सुरक्षा बलों और इंडिया रिजर्व बटालियन की तैनाती के साथ-साथ हेलीकॉप्टर सहायता को भी मजबूती दी गई है।
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छत्तीसगढ़ के संदर्भ में सरकार की ‘आत्मसमर्पण और पुनर्वास’ नीति एक बड़ी सफलता बनकर उभरी है। राज्य में सक्रिय नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने अपनी नीतियों को और अधिक आकर्षक बनाया है। आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों को ₹2.5 लाख से ₹5 लाख तक का तत्काल अनुदान दिया जा रहा है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के ‘यूएपीए’ (UAPA) मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए चार विशेष न्यायालय (Special Courts) शुरू किए गए हैं, जो न्यायिक प्रक्रिया में तेज़ी लाकर प्रभावित क्षेत्रों में कानून का शासन स्थापित करने में मदद कर रहे हैं।
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विकास के मोर्चे पर, छत्तीसगढ़ के बस्तर और दक्षिण अंचल में रोड कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट (RCPLWEA) के तहत हज़ारों किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण पूरा किया जा चुका है, जिससे सुरक्षा बलों और एम्बुलेंस की पहुँच आसान हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में संचालित एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय बच्चों को नक्सलवाद के साये से निकालकर आधुनिक भविष्य की ओर ले जा रहे हैं। बैंकिंग सेवाओं के विस्तार के तहत राज्य के सुदूर जिलों में 1,300 से अधिक एटीएम और सैकड़ों नई बैंक शाखाएं खोली गई हैं, जिससे वित्तीय समावेशन बढ़ा है। सरकार की इन कोशिशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ अब केवल संघर्ष का मैदान नहीं, बल्कि सुरक्षा और समृद्धि का नया मॉडल बन रहा है।
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