नई दिल्ली। दुनिया भर के मुसलमान इस समय इस्लाम धर्म के दो सबसे प्रमुख त्योहारों में से एक—ईद-उल-अज़हा (बकरीद)—की पवित्र तैयारियों में जुटे हुए हैं। इस्लामी चंद्र कैलेंडर के अनुसार, यह पर्व वर्ष के अंतिम महीने ‘जुल हिज्जा’ में मनाया जाता है। इसी पवित्र महीने में दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु मक्का की ऐतिहासिक ‘हज यात्रा’ पर भी निकलते हैं। चांद के दीदार के साथ ही इस त्योहार का उत्साह पूरे मुस्लिम समुदाय में दिखने लगा है।

सऊदी अरब की सुप्रीम कोर्ट सहित भारत, पाकिस्तान और खाड़ी देशों की चांद समितियों ने अपने-अपने देशों में बकरीद की तारीखों का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। भौगोलिक स्थिति और चांद दिखने के समय के अंतर के कारण अलग-अलग देशों में यह पर्व दो अलग-अलग दिनों पर मनाया जाएगा।

सऊदी अरब और खाड़ी देशों में 27 मई को मनेगी बकरीद

सऊदी कोर्ट और संबंधित देशों की समितियों द्वारा जारी बयानों के अनुसार, सऊदी अरब और अधिकांश वैश्विक देशों में इस साल ईद-उल-अज़हा बुधवार, 27 मई 2026 को मनाई जाएगी।

27 मई को त्योहार मनाने वाले प्रमुख देश:

  • सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कतर, ओमान और जॉर्डन।

  • पाकिस्तान, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर और तुर्किये।

  • अमेरिका, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम (UK), फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड।

भारत, बांग्लादेश और ब्रुनेई में 28 मई को होगी ईद

उपमहाद्वीप में चांद के दीदार के आधार पर भारत, बांग्लादेश और ब्रुनेई में ईद-उल-अज़हा गुरुवार, 28 मई 2026 को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाएगी। भारत के मुस्लिम संगठनों और उलेमाओं ने चांद की तस्दीक होने के बाद इस तारीख की पुष्टि की है।

कैसे मनाया जाता है यह पवित्र पर्व?

ईद-उल-अज़हा मुख्य रूप से त्याग, समर्पण और अल्लाह के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। इस दिन की प्रमुख परंपराएं इस प्रकार हैं:

  • विशेष नमाज: इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर, स्नान कर पारंपरिक और साफ-सुथरे कपड़े पहनते हैं। इसके बाद मस्जिदों और ईदगाहों में जाकर ईद की विशेष नमाज (खुतबा) अदा की जाती है और मुल्क व दुनिया में अमन-चैन की दुआ मांगी जाती है।

  • कुर्बानी की रस्म: नमाज मुकम्मल होने के बाद सुन्नत-ए-इब्राहीमी का पालन करते हुए हलाल जानवर की कुर्बानी दी जाती है और अल्लाह का शुक्र अदा किया जाता है।

  • भाईचारा और दान (सदका): बकरीद के मौके पर भाईचारे को विशेष महत्व दिया जाता है। लोग अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं।

  • गरीबों की मदद: इस त्योहार का सबसे खूबसूरत पहलू यह है कि कुर्बानी के गोश्त को तीन बराबर हिस्सों में बांटा जाता है—एक हिस्सा परिवार के लिए, दूसरा रिश्तेदारों के लिए और तीसरा हिस्सा अनिवार्य रूप से गरीबों और जरूरतमंदों के लिए होता है। इसके अलावा इस दिन गरीबों में नए कपड़े और जरूरत का सामान भी बांटा जाता है ताकि समाज का हर वर्ग त्योहार की खुशियों में शामिल हो सके।

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