नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में महिलाओं की नेतृत्व क्षमता को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से, पंचायती राज मंत्रालय आगामी 11 मार्च 2026 को नई दिल्ली में एक-दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित करने जा रहा है। ‘सशक्त पंचायत-नेत्री’ अभियान के अंतर्गत होने वाला यह सम्मेलन, इस अभियान की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारत में महिलाओं के नेतृत्व वाली जमीनी स्तर की शासन व्यवस्था को सशक्त बनाने और उनके योगदान का उत्सव मनाने के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में कार्य करेगा।

इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह मुख्य रूप से उपस्थित रहेंगे। इनके अलावा केंद्रीय महिला और बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी, केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल और केंद्रीय युवा कार्य और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव श्री विवेक भारद्वाज, मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही देश भर से आई लगभग 700 निर्वाचित महिला प्रतिनिधि और संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे।
सम्मेलन के दौरान राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा चुनी गई उत्कृष्ट महिला नेत्रियों को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में महिला-हितैषी ग्राम पंचायतों की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों और उनके द्वारा लाए गए बदलावों की कहानियों के संग्रह का विमोचन किया जाएगा। ये कहानियाँ ग्रामीण शासन में आए विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूलों पर आधारित होंगी। साथ ही, कार्यक्रम में दो तकनीकी सत्र भी आयोजित किए जाएंगे, जो ग्रामीण शासन में महिला नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता के विकास पर विशेष रूप से केंद्रित होंगे।
इस अभियान की पृष्ठभूमि पर गौर करें तो पंचायती राज मंत्रालय ने 4 मार्च 2025 को ‘सशक्त पंचायत-नेत्री’ अभियान का शुभारंभ किया था। इस पहल का मुख्य लक्ष्य जमीनी स्तर पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति को बढ़ाना है। मंत्रालय की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि संशोधित राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान के तहत वर्ष 2025-26 में 7,18,434 निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित किया गया है। इसके साथ ही, विशेष मॉड्यूल के जरिए 1,21,512 प्रतिनिधियों की क्षमता का विस्तार किया गया है। वर्तमान में 32 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 744 आदर्श महिला-हितैषी ग्राम पंचायतों की पहचान की गई है, जहाँ स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा जैसे संकेतकों के माध्यम से प्रगति की लगातार निगरानी की जा रही है।

