रायपुर। छत्तीसगढ़ शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका खुलासा विधानसभा में प्रस्तुत दस्तावेजों से हुआ है। प्रदेश के 33 जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और प्रभारी अधिकारियों के विरुद्ध गंभीर शिकायतों पर जाँच जारी है। इनमें रिश्वतखोरी से लेकर किताबों को रद्दी में बेचने जैसे आरोप शामिल हैं।
इन अधिकारियों पर है भ्रष्टाचार और अनियमितता का आरोप:
सबसे बड़ा मामला सूरजपुर के तत्कालीन प्रभारी DEO रामललित पटेल का है, जिन्हें 15 फरवरी 2025 को ACB ने रिश्वत लेते पकड़ा और वे वर्तमान में जेल में हैं। वहीं, जांजगीर-चांपा के के.एस. तोमर को नियम विरुद्ध अनुकंपा नियुक्ति के मामले में दोषी पाए जाने पर निलंबित किया जा चुका है।
केंद्र सरकार की ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बड़ी कार्रवाई
शिक्षकों की नियम विरुद्ध भर्ती और मनचाही पदस्थापना के मामले में कई नाम सामने आए हैं। कोंडागांव के राजेश मिश्रा पर सहायक ग्रेड-01 की गलत भर्ती, बलौदाबाजार के चैन सिंह ध्रुव और गरियाबंद के डी.एस. चौहान पर स्थानांतरण नीति के उल्लंघन का आरोप है। इसी कड़ी में बीजापुर के बलिराम बघेल और बेमेतरा के अरविंद मिश्रा भी जाँच के दायरे में हैं।
छत्तीसगढ़ में होली पर शराब दुकानें रहेंगी बंद, सरकार ने घोषित किया ड्राई डे
राजनांदगांव के आदित्य खरे पर पाठ्यपुस्तकों को रद्दी में बेचने का गंभीर आरोप है। वहीं, जशपुर के तत्कालीन डीईओ जे.के. प्रसाद, मुंगेली के जी.पी. भारद्वाज, महासमुंद के एस. चन्द्रसेन और बस्तर के भारती पर भंडार क्रय नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की खरीदी और वित्तीय अनियमितता के आरोप लगे हैं।
अब ग्रामीण खुद संभालेंगे अपनी जल व्यवस्था:मार्च में मनेगा ‘जल महोत्सव’
दस्तावेजों के अनुसार, शिकायतों की इस लंबी सूची में निम्नलिखित अधिकारियों के नाम भी प्रमुखता से दर्ज हैं, जिनकी जाँच संभागीय संयुक्त संचालकों द्वारा की जा रही है. संजय गुप्ता (तत्कालीन DEO, सरगुजा) – आत्मानंद स्कूल भर्ती में गड़बड़ी। ए.एन. गजेन्द्र (रायपुर) और बी.आर. ध्रुव (धमतरी) – कार्यालयीन कार्यों में लापरवाही। के.वी. राव और एम.पी. साहू – विभिन्न प्रशासनिक विसंगतियां। इसके अलावा कोरिया, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, और दंतेवाड़ा के तत्कालीन प्रभारियों के नाम भी इस ‘दागी’ सूची का हिस्सा हैं।
सामग्री खरीदी में अनियमितता बरतने वाले बेमेतरा की तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) श्रीमती मधुलिका तिवारी के खिलाफ जांच के बाद शासन द्वारा कार्रवाई की गई है।वर्ष 2022-23 के दौरान, बेमेतरा जिले में विज्ञान प्रायोगिक सामग्री और फर्नीचर की खरीदी की गई थी। इस खरीदी में भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं करने और वित्तीय अनियमितता बरतने की गंभीर शिकायतें सामने आई थीं।
खत्म हुई स्कॉलरशिप की ‘बंदिशें’: अब श्रमिक परिवारों के होनहारों को मिलेगा दोहरा आर्थिक लाभ
पाठ्यपुस्तकों को कबाड़ के भाव बेचने का इस घोटाले में आधा दर्जन अधिकारियों के नाम शामिल हैं:
जशपुर के प्रभारी DEO प्रमोद कुमार भटनागर और सहायक संचालक श्रीमती सरोज खलखो।
सूरजपुर के प्रभारी DEO रामललित पटेल (जो वर्तमान में जेल में निरुद्ध हैं)।राजनांदगांव के तत्कालीन DEO आदित्य खरे और अभय जायसवाल।धमतरी के प्रभारी DEO तेजराम जगदल्ले शामिल है.
हैरानी की बात यह है कि विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, इनमें से अधिकांश अधिकारियों के खिलाफ जाँच “प्रक्रियाधीन” है। कई मामलों में जाँच दल तो गठित किए गए हैं, लेकिन ठोस कार्रवाई और राशि की वसूली अब तक शून्य है। जांजगीर के मामले में 4.68 लाख की वित्तीय क्षति स्पष्ट होने के बावजूद अब तक वसूली की कार्यवाही शुरू नहीं हो पाई है।
यह पूरी सूची बताती है कि प्रदेश के शिक्षा विभाग में पदस्थ आला अधिकारी किस कदर नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। बस्तर से लेकर जशपुर तक, शायद ही कोई जिला बचा हो जहाँ के शिक्षा अधिकारी पर भ्रष्टाचार के छींटे न पड़े हों।
कैसे AI बना रहा है भारत के गाँवों को ‘स्मार्ट’ और आत्मनिर्भर


स्रोत: छत्तीसगढ़ विधानसभा

