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रायपुर। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का स्थापना दिवस इस वर्ष पूरे देश में भव्य रूप से मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में रविवार को ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ध्वजारोहण करेंगे, जिसके बाद संगोष्ठी का आयोजन होगा। इस कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। प्रदेश के सभी जिलों में भी स्थापना दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
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कांग्रेस का यह स्थापना दिवस विशेष इसलिए भी है क्योंकि पार्टी अपने 139 वर्षों की राजनीतिक यात्रा पूरी कर चुकी है। 28 दिसंबर 1885 को देश की आजादी की नींव रखने वाली इस पार्टी ने भारतीय राजनीति को दिशा देने का काम किया। आज भले ही कांग्रेस विपक्ष में हो, लेकिन आजादी से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक उसका योगदान ऐतिहासिक रहा है।
कांग्रेस की स्थापना बंबई के गोकुलदास संस्कृत कॉलेज मैदान में हुई थी। इसकी पहल थियॉसॉफिकल सोसायटी से जुड़े एओ ह्यूम ने की थी। उस समय देश के अलग-अलग हिस्सों से आए 72 प्रतिनिधियों ने मिलकर एक संगठन की नींव रखी, जिसे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नाम दिया गया। पार्टी के पहले अध्यक्ष वॉमेश चंद्र बनर्जी बने और एओ ह्यूम पहले महासचिव नियुक्त हुए। प्रारंभिक दौर में कांग्रेस का उद्देश्य अंग्रेजी हुकूमत के सामने भारतीयों की समस्याओं को संगठित रूप से रखना था, लेकिन धीरे-धीरे यही संगठन आजादी की सबसे बड़ी लड़ाई का नेतृत्वकर्ता बन गया।
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कांग्रेस के इतिहास में नेहरू–गांधी परिवार की भूमिका अहम रही है। हालांकि शुरुआती वर्षों में इस परिवार का ज्यादा दखल नहीं था, लेकिन 1919 में मोतीलाल नेहरू के अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी की दिशा बदलने लगी। इसके बाद जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने देश की राजनीति को दशकों तक प्रभावित किया। अब तक कांग्रेस के 57 अध्यक्ष बन चुके हैं, जिनमें सबसे लंबा कार्यकाल गांधी परिवार के सदस्यों का रहा है।
आजादी के बाद कांग्रेस सत्ता की सबसे मजबूत पार्टी बनकर उभरी। जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में देश को लोकतांत्रिक ढांचे में मजबूती मिली। इंदिरा गांधी के कार्यकाल में बैंकों का राष्ट्रीयकरण, हरित क्रांति और बांग्लादेश निर्माण जैसे बड़े फैसले हुए। हालांकि इसी दौर में पार्टी को आंतरिक कलह और विभाजन का भी सामना करना पड़ा। 1969 में इंदिरा गांधी को ही पार्टी से बाहर कर दिया गया, जिसके बाद कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई। इसके बाद इंदिरा गांधी ने कांग्रेस (आर) बनाकर सत्ता में वापसी की।
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कांग्रेस के इतिहास में टूट और बिखराव की घटनाएं भी कम नहीं रहीं। 1923 में चितरंजन दास ने स्वराज पार्टी बनाई, 1939 में सुभाष चंद्र बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक का गठन किया। आजादी के बाद 1950 से लेकर 2000 तक कांग्रेस से अलग होकर दर्जनों राजनीतिक दल बने। 1960 और 70 के दशक में कांग्रेस सबसे ज्यादा टूटी। 1978 में इंदिरा गांधी ने कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाई। इसके बाद ममता बनर्जी, शरद पवार, जगन मोहन रेड्डी, अजीत जोगी और अमरिंदर सिंह जैसे बड़े नेताओं ने भी कांग्रेस से अलग होकर अपनी राह चुनी।
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कुल मिलाकर अब तक कांग्रेस से अलग होकर 60 से अधिक राजनीतिक दल बन चुके हैं। इसके बावजूद कांग्रेस आज भी देश की प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी बनी हुई है। वर्तमान में मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जो लंबे समय बाद किसी गैर-गांधी परिवार के नेता हैं जिन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस का इतिहास भी मजबूत रहा है। राज्य निर्माण के बाद से कांग्रेस यहां सत्ता में रही है और संगठनात्मक रूप से भी मजबूत रही है। स्थापना दिवस के मौके पर पार्टी नेता इसे आत्ममंथन और भविष्य की रणनीति का अवसर मान रहे हैं।
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राजीव भवन में होने वाले कार्यक्रम को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि स्थापना दिवस केवल उत्सव नहीं, बल्कि पार्टी की विचारधारा, लोकतंत्र और संविधान के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराने का दिन है। आने वाले समय में कांग्रेस संगठन को और मजबूत कर जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाने का संकल्प लिया जाएगा।

