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ईरान की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अपने पिता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद, मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता चुन लिया गया है। इस चयन ने ईरान के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि यह प्रक्रिया ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) के भारी दबाव के बीच संपन्न हुई बताई जा रही है।
56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई, ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के दूसरे सबसे बड़े बेटे हैं। लंबे समय तक मोजतबा ईरान की सत्ता में एक ‘शैडो’ या पर्दे के पीछे रहने वाली हस्ती के रूप में सक्रिय रहे हैं। आधिकारिक पद पर न होते हुए भी, वे अपने पिता के कार्यालय का कामकाज प्रभावी ढंग से संभालते थे और महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णयों में उनकी भूमिका अहम मानी जाती थी। उनके ईरान के शक्तिशाली अर्धसैनिक बल ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स’ (IRGC) के साथ बेहद गहरे और मजबूत संबंध हैं।
मोजतबा की आर्थिक स्थिति और संपत्ति हमेशा से चर्चा और विवादों का विषय रही है। जांच रिपोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के अनुसार, मोजतबा एक विशाल निवेश साम्राज्य का संचालन करते हैं। उन पर स्विट्जरलैंड के बैंक खातों और विदेशों में महंगी अचल संपत्तियों के एक जटिल वित्तीय नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप लगते रहे हैं। इन्हीं वित्तीय गतिविधियों के चलते, 2019 में अमेरिका ने मोजतबा खामेनेई पर प्रतिबंध भी लगाए थे, जिसमें बिना किसी औपचारिक पद के सत्ता का दुरुपयोग करने के आरोप शामिल थे।
मोजतबा का सर्वोच्च नेता बनना ईरान में कई आंतरिक चुनौतियों और असंतोष का कारण बना हुआ है। ईरान का इस्लामी गणराज्य सिद्धांत रूप में वंशवादी शासन का विरोध करता है। इसलिए, एक पिता के बाद बेटे का सर्वोच्च नेता बनना ईरान की क्रांतिकारी विचारधारा के साथ विरोधाभासी माना जा रहा है। साथ ही, आलोचकों और जानकारों का मानना है कि मोजतबा के पास वह उच्च धार्मिक पद (आयतुल्ला) नहीं है, जो पारंपरिक रूप से सर्वोच्च नेता के लिए आवश्यक माना जाता है। वर्तमान में, मोजतबा खामेनेई के पास सुरक्षा तंत्र (IRGC) का समर्थन तो है, लेकिन ईरान की राजनीतिक और धार्मिक व्यवस्था के भीतर उनकी यह ताजपोशी भविष्य में कई नए विवादों को जन्म दे सकती है।

