रायपुर। छत्तीसगढ़ में जहाँ एक ओर कबीरधाम और बलौदाबाजार जैसे जिलों में पलायन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, वहीं राज्य के 21 जिलों से आई एक आधिकारिक रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के आधे से अधिक जिलों में पलायन की स्थिति ‘शून्य’ दर्ज की गई है। इन जिलों में पिछले तीन वर्षों (2023-24 से 2025-26) में रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले ग्रामीणों की संख्या ‘निरंक’ रही है।
रायपुर मॉडल: रोजगार की उपलब्धता ने रोका पलायन
राजधानी रायपुर में पलायन का आंकड़ा शून्य होना यह दर्शाता है कि शहर के आसपास औद्योगिक विकास, निर्माण कार्यों और सेवा क्षेत्र में रोजगार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। स्थानीय स्तर पर काम मिलने के कारण यहाँ के ग्रामीणों को दूसरे राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ रहा है।
बस्तर और सरगुजा संभाग में ‘निरंक’ आंकड़े
हैरान करने वाली बात यह है कि कभी पिछड़े माने जाने वाले बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर और नारायणपुर जैसे सुदूर वनांचल जिलों में भी पलायन की संख्या शून्य दर्ज है। इसी तरह सरगुजा संभाग के कोरबा, सरगुजा और कोरिया जैसे जिलों में भी स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
शून्य पलायन वाले प्रमुख जिले:धमतरी, गरियाबंद, बालोद, दुर्ग, कोंडागांव, कांकेर, सुकमा, बीजापुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, और मोहला-मानपुर।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
जानकारों का मानना है कि इन 21 जिलों में पलायन न होने के पीछे दो बड़े कारण हो सकते हैं। पहला— स्थानीय स्तर पर मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन। दूसरा— इन क्षेत्रों में कृषि और लघु वनोपज आधारित स्थानीय बाजार का मजबूत होना। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इन जिलों में डेटा के संकलन और रिपोर्टिंग की प्रक्रिया को भी गहराई से देखने की जरूरत है।
पलायन मुक्त जिलों की सूची (वर्ष 2023-26)
सरकारी प्रपत्र के अनुसार, निम्नलिखित जिलों में पलायन प्रभावित ग्रामों की संख्या 0 है:
* मध्य छत्तीसगढ़: रायपुर, धमतरी, गरियाबंद, बालोद, दुर्ग।
*बस्तर संभाग: बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर।
* नवगठित जिले: सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मोहला-मानपुर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर।
* अन्य: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कोरिया, सरगुजा, कोरबा।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यदि स्थानीय स्तर पर आजीविका के साधन मजबूत हों, तो छत्तीसगढ़ को पूरी तरह ‘पलायन मुक्त’ राज्य बनाया जा सकता है।
क

