अब आपके शहर से भी उड़ेगा विमान! 10 साल के लिए ‘उड़ान’ योजना का नया अवतार; छोटे शहरों में एयर कनेक्टिविटी के लि 100 नए एयरपोर्ट और 200 हेलीपैड को मिली हरी झंडी,
नई दिल्ली | 26 मार्च 2026
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) की नीतियों और केंद्र सरकार के निरंतर प्रयासों का ही परिणाम है कि आज भारत में मोबाइल और डेटा सेवाएं वैश्विक स्तर पर सबसे किफायती बनी हुई हैं। संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने लोकसभा में एक जानकारी साझा करते हुए बताया कि ट्राई द्वारा तैयार की गई नियामक रूपरेखा ने न केवल बाजार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दिया है, बल्कि ग्राहकों को दुनिया के सबसे कम टैरिफ का लाभ भी सुनिश्चित किया है। हालांकि, कम कीमत के साथ-साथ सेवाओं की गुणवत्ता को बरकरार रखना सरकार की प्राथमिकता है, जिसके लिए ट्राई अब और भी कड़े कदम उठा रहा है। अब केवल सस्ता होना काफी नहीं है, बल्कि टेलीकॉम कंपनियों को कॉल और डेटा की बेहतरीन क्वालिटी देना अनिवार्य होगा, अन्यथा उन्हें भारी वित्तीय दंड का सामना करना पड़ेगा।
सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए ट्राई ने ‘सेवा गुणवत्ता मानक, 2024’ के तहत सख्त जुर्माना प्रणाली लागू की है। इसके अनुसार, यदि कोई टेलीकॉम कंपनी नेटवर्क क्वालिटी के निर्धारित मानकों का पहली बार उल्लंघन करती है, तो उसे प्रति मानक 1 लाख रुपये तक का भुगतान करना होगा। यदि यही गड़बड़ी लगातार दूसरी बार पाई जाती है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर 2 लाख रुपये हो जाएगी और उसके बाद होने वाले हर लगातार उल्लंघन पर कंपनियों को 3 लाख रुपये का दंड देना होगा। यह सख्त व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि कंपनियां ग्राहकों के हितों से समझौता न कर सकें और अपनी सेवाओं में निरंतर सुधार लाएं।
नेटवर्क की जमीनी हकीकत जानने के लिए ट्राई अब केवल कंपनियों द्वारा भेजी गई कागजी रिपोर्टों पर निर्भर नहीं रहता है। प्राधिकरण अब अपने अधिकारियों और स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से ‘वाहन चालन परीक्षण’ (Drive Test) आयोजित करता है। इस प्रक्रिया में चयनित रास्तों पर जाकर सिग्नल की ताकत और कॉल क्वालिटी की लाइव जांच की जाती है। इन परीक्षणों के परिणामों को ट्राई की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाता है ताकि पारदर्शिता बनी रहे और ग्राहकों को पता चल सके कि उनके क्षेत्र में कौन सा ऑपरेटर सबसे विश्वसनीय है। इसके साथ ही, मोबाइल सेवाओं के लिए अब कंपनियों को मासिक आधार पर अपनी परफॉरमेंस रिपोर्ट जमा करनी होती है, जिसकी कड़ी समीक्षा के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाती है।

