अब भाषा नहीं बनेगी पर्यटन में बाधा: अपनी ही जुबान में गाइड करेगा ‘1363’ नंबर , महिला पर्यटकों को मिला सुरक्षा कवच, 15 राज्यों में तैनात ‘पर्यटन प्रहरी’,

 रायपुर |

 भारत आज एक ऐसे युग की ओर बढ़ रहा है जहाँ कानून की सख्ती अपराधियों के लिए काल है, तो वहीं समाज के अंतिम व्यक्ति के लिए सुरक्षा का एक अभेद्य कवच। लोकसभा में पेश की गई विभिन्न रिपोर्टों और राज्यों से आई उपलब्धियों को देखें तो देश में ‘सबका न्याय, सबका विकास’ का संकल्प धरातल पर उतरता दिख रहा है।

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सुरक्षा का नया विधिक ढांचा

सुरक्षा की इस कड़ी में सबसे पहला और बड़ा प्रहार अपराधियों पर किया गया है। भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 के तहत अब मानव तस्करी को ‘संगठित अपराध’ मानकर मृत्युदंड तक की सजा का प्रावधान किया गया है। वहीं, बच्चों की सुरक्षा के लिए पोक्सो (POCSO) कानून को और अधिक सख्त बनाते हुए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि 18 वर्ष से कम उम्र में ‘सहमति’ का कोई स्थान नहीं है। कानून का यह कड़ा रुख न केवल अपराधियों में भय पैदा कर रहा है, बल्कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे आंदोलनों के कारण देश के लिंगानुपात में भी ऐतिहासिक सुधार (929) देखने को मिल रहा है।

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न्याय की सुलभता और युवाओं का संबल

कानून केवल किताबों तक सीमित न रहे, इसके लिए दिव्यांगजनों हेतु ‘मनोन्याय’ जैसी इकाइयां गठित की गई हैं और ई-कोर्ट्स के माध्यम से न्याय को डिजिटल और सुलभ बनाया गया है। न्याय के इस रथ को खींचने वाले युवा अधिवक्ताओं को भी सरकार ने नहीं भुलाया है; उनके शुरुआती संघर्ष को देखते हुए शहरी क्षेत्रों में 20,000 रुपये तक के मासिक स्टाइपेंड की सिफारिश की गई है, ताकि आर्थिक तंगी किसी मेधावी वकील के आड़े न आए।

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‘हिंसा से हुनर’ और पर्यावरण का संगम

सामाजिक परिवर्तन की सबसे खूबसूरत तस्वीर छत्तीसगढ़ के बस्तर से उभर रही है। नक्सल पुनर्वास नीति-2025 के तहत जिन हाथों ने कभी बंदूकें थामी थीं, आज वे ‘कौशलगढ़’ (चौगेल कैंप) में ड्राइविंग, सिलाई और इलेक्ट्रिशियन का हुनर सीख रहे हैं। यह ‘हिंसा से हुनर’ की ओर बढ़ता एक ऐसा कदम है जो आत्मसमर्पित माओवादियों को सम्मानजनक जीवन दे रहा है। इसी के साथ, छत्तीसगढ़ का जशपुर अब पर्यावरण संरक्षण में भी देश का नेतृत्व कर रहा है, जहाँ सरना एथनिक रिसॉर्ट को प्रतिष्ठित ‘ग्रीन लीफ अवॉर्ड’ से नवाजा गया है।

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आत्मनिर्भरता की चौतरफा उड़ान

सरकार की यह विकास यात्रा केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है। आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज, 1 रुपये में सैनिटरी पैड, और उज्ज्वला व आवास योजनाओं के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। ये सभी प्रयास मिलकर एक ऐसे भारत का निर्माण कर रहे हैं जहाँ बेटियां सुरक्षित हैं, युवा हुनरमंद हैं, दिव्यांगों को न्याय सुलभ है और भटका हुआ युवा समाज की मुख्यधारा में लौटकर देश के विकास में अपना योगदान दे रहा है।

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