नई दिल्ली | 24मार्च 2026
केंद्र सरकार ने डिजिटल इंडिया अभियान के तहत शासन और पारदर्शिता की दिशा में आज एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) ने एक व्यापक ‘आंतरिक लेखा परीक्षा पोर्टल’ (Internal Audit Portal) के संचालन की आधिकारिक घोषणा की है, जो मंत्रालय के कामकाज के तरीके को पूरी तरह से बदल देगा।
इस नए डिजिटल प्लेटफॉर्म के आने से अब ऑडिट की प्रक्रिया पारंपरिक मैन्युअल ट्रैकिंग और फाइलों के जाल से निकलकर वास्तविक समय (Real-time) के केंद्रीकृत डिजिटल इकोसिस्टम में तब्दील हो गई है। राष्ट्रीय सूचना केंद्र (NIC) द्वारा विकसित इस पोर्टल की आज सचिव श्री शैलेश कुमार सिंह और मुख्य लेखा नियंत्रक श्री अखिलेश झा की उपस्थिति में विस्तृत समीक्षा की गई। इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब सचिव स्तर के अधिकारी सीधे तौर पर सभी विभागों में ऑडिट की स्थिति और धन के उपयोग की निगरानी कर सकेंगे, जिससे जवाबदेही का एक अभूतपूर्व स्तर स्थापित होगा।
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इस नए सिस्टम के लागू होने से ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में होने वाली वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक बाधाओं पर लगाम कसना आसान हो जाएगा। श्री शैलेश कुमार सिंह ने पोर्टल की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह तकनीक केवल निगरानी को मजबूत नहीं करेगी, बल्कि ऑडिट के निष्कर्षों पर समय पर कार्रवाई सुनिश्चित करने में भी निर्णायक भूमिका निभाएगी।
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इस पोर्टल के जरिए अब ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) और लंबित अनुपालन की जानकारी एक सिंगल डैशबोर्ड पर उपलब्ध होगी, जिससे वरिष्ठ नेतृत्व को साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि यह प्रणाली 365 दिन निरंतर निगरानी करने में सक्षम है, जिससे अब ऑडिट के लिए साल के अंत का इंतजार नहीं करना पड़ेगा और किसी भी प्रकार की वित्तीय गड़बड़ी को शुरुआती स्तर पर ही पकड़ा जा सकेगा।
संस्थागत उत्कृष्टता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाए गए इस पोर्टल में ‘स्वचालित ट्रिगर’ (Automated Triggers) जैसा आधुनिक फीचर शामिल किया गया है, जो अनुपालन में होने वाली देरी पर तुरंत अलर्ट भेजेगा। इससे फील्ड ऑफिसर से लेकर मुख्यालय तक हर प्रशासनिक स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी।
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मंत्रालय का लक्ष्य इस डिजिटल ढांचे के माध्यम से “अनुपालन अंतर” (Compliance Gap) को न्यूनतम करना और यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण विकास के लिए आवंटित अरबों रुपये का एक-एक पैसा वित्तीय अनुशासन और पारदर्शिता के उच्चतम मानकों के साथ खर्च हो। यह कदम न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में चल रही योजनाओं को अधिक प्रभावशाली बनाएगा, बल्कि सरकारी धन के सदुपयोग के मामले में एक नया बेंचमार्क भी स्थापित करेगा।

