नई दिल्ली।
असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले करोड़ों श्रमिकों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना का संचालन कर रही है। यह योजना उन मेहनतकश लोगों के लिए एक बड़ी राहत है, जिनके पास बुढ़ापे के लिए कोई स्थायी पेंशन व्यवस्था नहीं है। इस योजना के तहत पात्र श्रमिकों को 60 वर्ष की आयु के बाद जीवनभर हर महीने 3,000 रुपये की सुनिश्चित पेंशन प्रदान की जाती है।
सरकार की यह पेंशन योजना विशेष रूप से उन श्रमिकों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपये या उससे कम है। इसमें रेहड़ी-पटरी वाले, घरेलू कामगार, रिक्शा चालक, निर्माण श्रमिक, कृषि मजदूर, दुकानदार और स्वरोजगार से जुड़े अन्य लोग शामिल हो सकते हैं। योजना का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि असंगठित क्षेत्र के श्रमिक भी बुढ़ापे में सम्मानजनक जीवन जी सकें।
इस योजना में 18 से 40 वर्ष की आयु के श्रमिक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की उम्र के अनुसार ही मासिक अंशदान तय किया जाता है, जो न्यूनतम 55 रुपये से लेकर अधिकतम 200 रुपये तक होता है। यह अंशदान लाभार्थी को 60 वर्ष की उम्र तक जमा करना होता है। इसके बाद 60 वर्ष पूरे होते ही पेंशन की राशि हर महीने सीधे बैंक खाते में मिलने लगती है।
योजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यदि किसी कारणवश लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन का 50 प्रतिशत हिस्सा हर महीने पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाता है। इससे श्रमिक के परिवार को भी आर्थिक सहारा मिलता है।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में आवेदन की प्रक्रिया भी बेहद सरल रखी गई है। इच्छुक श्रमिक अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर योजना में पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, पहचान पत्र, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर, पत्र व्यवहार का पता और पासपोर्ट साइज फोटो जैसे आवश्यक दस्तावेजों की जरूरत होती है।
कम निवेश और गारंटीड पेंशन की वजह से यह योजना देशभर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। सरकार का मानना है कि यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है और उनके भविष्य को आर्थिक रूप से सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभा रही है।

