नई दिल्ली: टेलीविजन पर दिखाए जाने वाले उन विज्ञापनों पर अब सरकार ने शिकंजा कस दिया है जो उत्पादों के चमत्कारिक, जादुई या अलौकिक गुणों का दावा करते हैं। लोकसभा में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मौजूदा विज्ञापन संहिता के तहत ऐसे किसी भी विज्ञापन के प्रसारण पर रोक है जिसमें ऐसे संदर्भ हों जिससे जनता को यह लगे कि विज्ञापित उत्पाद में कोई विशेष या अलौकिक गुण है जिसे सिद्ध करना संभव नहीं है। केबल टेलीविजन नेटवर्क (विनियमन) अधिनियम, 1995 के तहत निर्धारित विज्ञापन संहिता के नियम 7(5) का उल्लंघन करने वाले निजी टीवी चैनलों के खिलाफ मंत्रालय द्वारा सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा के लिए केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने “भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम और भ्रामक विज्ञापनों के लिए अनुमोदन पर रोक हेतु दिशानिर्देश, 2022” जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब विज्ञापनों के लिए कड़ी शर्तें निर्धारित की गई हैं, जिसमें छद्म विज्ञापनों पर प्रतिबंध और बच्चों को लक्षित करने वाले विज्ञापनों के लिए विशेष नियम शामिल हैं। दिशानिर्देशों के खंड 13 के अनुसार, किसी भी विज्ञापन को प्रदर्शित करने से पहले विज्ञापनदाताओं और संबंधित एजेंसियों के लिए ‘उचित सावधानी’ (Due Diligence) बरतना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि विज्ञापन में किया गया कोई भी दावा केवल हवा-हवाई नहीं होना चाहिए, बल्कि वह उत्पाद या सेवा के वास्तविक अनुभव और पर्याप्त जानकारी पर आधारित होना चाहिए।
सरकार ने विज्ञापनों में सेलिब्रिटी या पेशेवरों द्वारा किए जाने वाले समर्थन (Endorsement) को लेकर भी नियम स्पष्ट किए हैं। अब विज्ञापन में किया गया दावा उस व्यक्ति या संगठन की वास्तविक और वर्तमान राय को दर्शाने वाला होना चाहिए। इसके अलावा, यदि भारतीय कानूनों के तहत किसी विशेष पेशे के भारतीय पेशेवरों को विज्ञापन में किसी उत्पाद का समर्थन करने से रोका गया है, तो उसी पेशे के विदेशी पेशेवरों पर भी यही पाबंदी लागू होगी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय समय-समय पर सभी प्रसारकों को इन नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एडवाइजरी जारी करता रहता है, ताकि उपभोक्ताओं को गुमराह होने से बचाया जा सके।

