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जशपुर:

मानसून की शुरुआत के साथ ही जिले में सांपों का खतरा काफी बढ़ गया है। लगातार हो रही बारिश के कारण जब सांपों के प्राकृतिक बिलों और सुरक्षित ठिकानों में पानी भर जाता है, तो वे सूखी और सुरक्षित जगहों की तलाश में बाहर आ जाते हैं। इस दौरान रेंगते हुए सांप अक्सर खुली सड़कों, खेत-खलिहानों, झाड़ियों और ग्रामीण व शहरी इलाकों में घरों के आसपास दीवारों के किनारे पहुंच जाते हैं। वन विभाग के अनुसार, जशपुर जिले में एक दर्जन से भी अधिक सांपों की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें से पांच प्रजातियां सबसे ज्यादा जहरीली और जानलेवा मानी जाती हैं। बरसात के इस मौसम में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

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इन तीन सबसे खतरनाक प्रजातियों से रहें बेहद सावधान

जिले में पाए जाने वाले सांपों में मुख्य रूप से तीन प्रजातियां इंसानों के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं, जो पलक झपकते ही किसी को भी मौत की नींद सुला सकती हैं। इनमें पहला है ‘कॉमन इंडियन करैत’, जो आकार में भले ही छोटा होता है, लेकिन इसका जहर बेहद खतरनाक न्यूरोटॉक्सिक होता है। यह सांप चुपचाप इंसान के बिस्तर तक पहुंच जाता है और सोते हुए व्यक्ति को काट लेता है क्योंकि इसे इंसानों के शरीर की गर्मी बहुत पसंद होती है। दूसरा है ‘रसल वाइपर’, जिसे स्थानीय स्तर पर ‘ग्रीन पीट’ के नाम से भी जाना जाता है और यह बेहद आक्रामक स्वभाव का होता है। तीसरी खतरनाक प्रजाति ‘स्पैक्टेकल कोबरा’ यानी गेहूंअन की है, जिसके फन पर चश्मे जैसी दो धारी बनी रहती है। इनके विपरीत धामिन, रॉक पाइथन (अजगर), कॉमन सैंड बोआ, ढोंढ़ सांप और कॉपर ट्रिकेट जैसी प्रजातियां जहरीली नहीं होती हैं।

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तिकोने सिर से करें जहरीले सांप की तुरंत पहचान

सांप जहरीला है या नहीं, इसे आम लोग भी एक बहुत ही आसान तरीके से पहचान सकते हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों केसर हुसैन और राहुल तिवारी के अनुसार, आमतौर पर जहरीले सांप का सिर हमेशा तिकोना यानी ट्राइएंगल के आकार का होता है। इसके अलावा, ज्यादातर जहरीले सांपों के चेहरे पर एक छोटा सा छिद्र या पिट होता है। इस विशेष छिद्र के माध्यम से ये सांप अपने जहर और तापमान को नियंत्रित करते हैं और इसी की मदद से अपने दुश्मन या शिकार पर सटीक हमला करते हैं। इस बनावट को देखकर दूर से ही सतर्क हुआ जा सकता है।

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अंधविश्वास छोड़ें: सर्पदंश पर झाड़-फूंक नहीं, सीधे जाएं अस्पताल

जिले में बढ़ रहे सर्पदंश के मामलों पर गहरी चिंता जताते हुए सर्प विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि सांप काटने पर झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें। जिले में अब तक कई लोग सांप के काटने से अपनी जान गंवा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश घटनाएं ग्रामीण इलाकों में हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अक्सर ओझा-गुनी के अंधविश्वास में पड़कर कीमती समय बर्बाद कर देते हैं, जिससे जहर पूरे शरीर में फैल जाता है और मरीज की मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि गुमला सदर अस्पताल और जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों में सांप काटने की मुख्य दवा यानी एंटी-स्नेक वेनम पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, इसलिए पीड़ित को बिना समय गंवाए सीधे नजदीकी अस्पताल लेकर आएं।

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अगर न छेड़ें तो फसलों की रक्षा करने वाले ‘सच्चे दोस्त’ हैं सांप

पर्यावरण और कृषि के दृष्टिकोण से देखा जाए तो सांप इंसान के दुश्मन नहीं बल्कि किसानों के सबसे अच्छे मित्र हैं। सांप को जब तक कोई उकसाए या छेड़े नहीं, तब तक वह आत्मरक्षा में उग्र होकर सामने वाले पर हमला नहीं करता है। खेतों में चूहे और कई तरह के कीट-पतंगे फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। लेकिन जिस खेत में सांपों का मूवमेंट रहता है, वहां चूहे और फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य जीव डर के मारे नहीं आते हैं क्योंकि सांप उनका शिकार कर लेते हैं। इस तरह सांप प्राकृतिक रूप से फसलों की रक्षा करते हैं और पर्यावरण का संतुलन बनाए रखते हैं।

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