रायपुर, 25 सितंबर 2025
छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए सरकार अब बड़े स्तर पर सुधार करने जा रही है। राज्य के उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के महाविद्यालयों में शिक्षक-छात्र अनुपात को लेकर गड़बड़ियां पाई गई हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कहीं शिक्षक जरूरत से अधिक हैं, तो कहीं बेहद कम। इस असंतुलन को दूर करने के लिए विभाग अब युक्तियुक्तकरण की तर्ज पर “सर्जरी” करेगा।
मंत्री वर्मा ने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जहां शिक्षकों की अधिक आवश्यकता है, वहां तुरंत व्यवस्था की जाएगी, और जहां आवश्यकता से अधिक शिक्षक पदस्थ हैं, वहां उनका समायोजन होगा। साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि इस समय 700 पदों पर भर्ती के लिए स्वीकृति मिल चुकी है, और शेष रिक्त पदों की पूर्ति की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होगी।
प्रदेश में उच्च शिक्षा का तेजी से विस्तार हो रहा है। सत्र 2022-23 में 6 नए शासकीय और 25 नए अशासकीय महाविद्यालयों की शुरुआत की गई है। अब राज्य में कुल 9 शासकीय विश्वविद्यालय और 335 शासकीय महाविद्यालय संचालित हो रहे हैं, जिनमें इस समय लगभग 3.35 लाख छात्र अध्ययनरत हैं। केवल संख्या बढ़ाने पर ही नहीं, गुणवत्ता पर भी विभाग लगातार ध्यान दे रहा है। पिछले दो वर्षों में विभिन्न विषयों के 1,167 सहायक प्राध्यापकों के साथ-साथ 40 ग्रंथपाल और 39 क्रीड़ा अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है।
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत राज्य के आठ स्वशासी महाविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम को च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के साथ लागू किया गया है, जिसमें मूल्य-आधारित शिक्षा को भी शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, इस सत्र से प्रदेश के 10 शासकीय कॉलेजों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।
शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता को लेकर विभाग की गंभीरता के चलते नैक मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी गति दी गई है। राज्य के 211 पात्र शासकीय कॉलेजों में से 175 का नैक मूल्यांकन पूरा हो चुका है, वहीं 244 अशासकीय महाविद्यालयों में से 27 संस्थानों का मूल्यांकन किया गया है। शेष महाविद्यालयों की प्रक्रिया प्रगति पर है।
सरकार का मानना है कि जब तक शिक्षक-छात्र अनुपात संतुलित नहीं होगा, तब तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना संभव नहीं है। यही वजह है कि अब उच्च शिक्षा में ‘युक्तियुक्तकरण’ के जरिए एक ऐसी व्यवस्था तैयार की जा रही है, जो सभी छात्रों को समान और उच्च स्तरीय शैक्षणिक सुविधा उपलब्ध कराएगी।

