नई दिल्ली | 05 मार्च, 2026
देश के पिछड़े और विकास की दौड़ में पीछे रह गए आकांक्षी जिलों और ब्लॉकों में स्वास्थ्य सेवाओं को नई संजीवनी मिलने वाली है। पोषण और स्वास्थ्य परिणामों में सुधार के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, नीति आयोग और यूनिसेफ इंडिया ने आज रणनीतिक हस्तक्षेपों का समर्थन करने के लिए एक ‘आशय पत्र’ (Letter of Intent) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य दोनों संस्थानों की क्षमताओं का लाभ उठाकर वंचित क्षेत्रों में विशेष रूप से मातृ एवं शिशु पोषण के स्तर में क्रांतिकारी सुधार लाना है।
यह साझेदारी बहु-हितधारक सहभागिता को बढ़ावा देने और ब्लॉक स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी कार्यान्वयन प्रणालियों को मजबूत करने में सहयोग करेगी। नीति आयोग के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक श्री रोहित कुमार ने इस अवसर पर कहा कि आकांक्षी जिला एवं ब्लॉक कार्यक्रम ने समन्वय और डेटा-आधारित शासन के महत्व को पहले ही सिद्ध कर दिया है। उन्होंने बल दिया कि यूनिसेफ इंडिया जैसे वैश्विक संगठनों के साथ जुड़ने से गंभीर चुनौतियों का समाधान करने और उच्च प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में अंतिम छोर तक सेवा वितरण को बेहतर बनाने के प्रयासों को और अधिक मजबूती मिलेगी।
यूनिसेफ इंडिया अपने ‘इंपैक्ट4न्यूट्रिशन’ (I4N) प्लेटफॉर्म के माध्यम से व्यवसायों, सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों और उद्योग संघों के साथ तकनीकी विशेषज्ञता साझा करेगा ताकि सीएसआर निवेश को सही दिशा में निर्देशित किया जा सके। इस पूरी पहल का ध्यान आंगनवाड़ी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, पोषण साक्षरता बढ़ाने और अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं की क्षमता निर्माण पर केंद्रित रहेगा।
यह सहयोग न केवल स्वास्थ्य हस्तक्षेपों के लिए निजी क्षेत्र के भागीदारों को जुटाएगा, बल्कि सामुदायिक सहभागिता को भी बढ़ावा देगा। इसके साथ ही, आकांक्षी क्षेत्रों में लागू किए जा सकने वाले सर्वोत्तम तौर-तरीकों की पहचान और उनके प्रसार के लिए ज्ञान साझाकरण प्लेटफॉर्म का भी समर्थन किया जाएगा। यह साझा प्रतिबद्धता साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण और सरकार, निजी क्षेत्र एवं समुदायों के बीच एक समन्वित कार्रवाई के माध्यम से देश के स्वास्थ्य भविष्य को उज्ज्वल बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है।

