वेंचुरा सिक्योरिटीज के ताजा आउटलुक में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमतें साल के अंत तक $3,600 प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। इसकी मुख्य वजहें वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की बढ़ती मांग हैं। पीटीआई की खबर के मुताबिक, 7 अगस्त को कॉमेक्स गोल्ड फ्यूचर्स की कीमत पहले ही $3,534.10 प्रति औंस के सर्वकालिक उच्च स्तर को छू चुकी है, और वेंचुरा को उम्मीद है कि यह साल के आखिर तक और चढ़ेगा।
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घरेलू बाजार में भी रिकॉर्ड स्तर
भारत में 8 अगस्त को MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर अक्टूबर डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स की कीमत ₹1,02,250 प्रति 10 ग्राम के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गई। वेंचुरा का कहना है कि कमजोर अमेरिकी अर्थव्यवस्था, डॉलर इंडेक्स पर दबाव, वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक जोखिमों के कारण सोना उतार-चढ़ाव के बावजूद मजबूती दिखा रहा है।
साल के अंत तक चमकेगा सोना
वेंचुरा के कमोडिटी प्रमुख एन.एस. रामास्वामी ने कहा कि मुद्रास्फीति का दबाव, डॉलर की कमजोरी और फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर कटौती के चलते 2025 के बाकी महीनों में सोने की कीमतों में मजबूती बनी रहने की संभावना है। मजबूत ETF निवेश, केंद्रीय बैंक की खरीदारी और भारत में खुदरा भागीदारी इस तेजी को और बल देंगे।
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ग्लोबल डिमांड से सोने को सहारा
2025 की दूसरी तिमाही में वैश्विक सोने की मांग 3% बढ़कर 1,249 टन हो गई, जिसकी कीमत 132 अरब डॉलर आंकी गई, यह मूल्य के लिहाज़ से 45% की वृद्धि है। गोल्ड ETFs (एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स) में निवेश भी तेजी से बढ़ा है। 30 जून 2025 तक वैश्विक गोल्ड ETF होल्डिंग्स 16% बढ़कर 3,616 टन हो गया है। इसके अलावा, UM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) 64% बढ़कर $383 अरब पर जा पहुंचा है।
भारत में भी डिजिटल गोल्ड हो रहा पॉपुलर
भारत की बात करें तो यहां भी लोगों ने इस वैश्विक रुझान को अपनाया है। आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड ETF होल्डिंग्स 42% बढ़कर 66.68 टन और AUM ₹64,777 करोड़ (लगभग दोगुना) हो गया है। निवेशक के खाते 41% बढ़कर 76.54 लाख हो चुके हैं, जो पिछले 4 वर्षों में 317% की वृद्धि है। वेंचुरा के अनुसार, युवा निवेशक अब डिजिटल गोल्ड, ETF, फ्रैक्शनल गोल्ड ओनरशिप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को प्राथमिकता दे रहे हैं। हालांकि भौतिक आभूषणों की मांग अब भी स्थिर है, लेकिन ऑफलाइन और ऑनलाइन का संयोजन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।
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लंबी अवधि के रिटर्न में गोल्ड का दबदबा
पिछले 20 सालों में 14 बार गोल्ड ने सकारात्मक सालाना रिटर्न दिया है। पिछले 3 वर्षों में गोल्ड ने औसतन 23% सालाना रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी 50 का औसत रिटर्न सिर्फ 11% रहा है। यह रुझान दिखाता है कि सोना महंगाई के खिलाफ एक विश्वसनीय निवेश विकल्प बना हुआ है। वेंचुरा ने बताया कि केंद्रीय बैंक लगातार सोने की खरीदारी कर रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने फरवरी 2024 से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) की नई किश्तें जारी करना बंद कर दिया है, जिससे ETF और डिजिटल निवेश की मांग में और वृद्धि देखी जा रही है।