नई दिल्ली: भविष्य की तकनीक, रक्षा और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत एक बड़ी वैश्विक शक्ति बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने खुलासा किया कि भारत के पास वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा दुर्लभ पृथ्वी खनिज (Rare Earth Minerals) भंडार मौजूद है। परमाणु खनिज निदेशालय (AMD) के हालिया अन्वेषणों ने देश के विभिन्न हिस्सों में इन रणनीतिक खनिजों की विशाल उपलब्धता की पुष्टि की है। केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात के तटीय इलाकों में जहां करोड़ों टन मोनाजाइट संसाधन पाए गए हैं, वहीं गुजरात के छोटा उदेपुर और राजस्थान के बालोतरा जैसे कठोर चट्टानी इलाकों में भी भारी मात्रा में रेयर अर्थ ऑक्साइड के भंडार मिले हैं। इसके अतिरिक्त छत्तीसगढ़ और झारखंड की नदियों के जलोढ़ जमाव में भी ‘जेनोटाइम’ जैसे कीमती खनिजों की मौजूदगी दर्ज की गई है।
हालांकि भारत के पास संसाधनों का विशाल भंडार है, लेकिन इनका निष्कर्षण (Extraction) काफी जटिल और महंगा है क्योंकि ये खनिज अक्सर रेडियोधर्मी तत्वों के साथ जुड़े होते हैं। इस चुनौती से निपटने और भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र सरकार ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। सरकार ने हाल ही में ‘सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ के निर्माण के लिए 7,280 करोड़ रुपये की एक महत्वाकांक्षी प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी है। इस योजना का मुख्य लक्ष्य देश में प्रति वर्ष 6,000 मीट्रिक टन चुंबक उत्पादन क्षमता विकसित करना है, जो इलेक्ट्रिक वाहनों (EV), पवन टरबाइन और उन्नत रक्षा प्रणालियों के लिए अनिवार्य घटक है। विशाखापत्तनम में एक विशेष स्थायी चुम्बक संयंत्र की स्थापना भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।
रणनीतिक निवेश के साथ-साथ सरकार ने नीतिगत स्तर पर भी बड़े बदलाव किए हैं ताकि निजी निवेश और उद्योग को बढ़ावा मिल सके। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (NCMM) के तहत अन्वेषण से लेकर पुनर्चक्रण तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जा रहा है, जिसमें खनिजों के पुनर्चक्रण (Recycling) को प्रोत्साहित करने के लिए 1,500 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है। इतना ही नहीं, सरकार ने केंद्रीय बजट के माध्यम से लिथियम, कोबाल्ट और अन्य 25 महत्वपूर्ण खनिजों पर सीमा शुल्क को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। विदेशों में भी खनिज संपदा हासिल करने के लिए ‘खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड’ (KABIL) को सक्रिय किया गया है, जो लिथियम और कोबाल्ट जैसे भंडारों के अधिग्रहण पर काम कर रही है। इन साझा प्रयासों से उम्मीद है कि भारत न केवल अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि वैश्विक दुर्लभ पृथ्वी खनिज बाजार में एक प्रमुख निर्यातक के रूप में भी स्थापित होगा।

