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नई दिल्ली | 29 मार्च 2026
भारत को क्लीन और ग्रीन एनर्जी का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए हाइड्रोजन से चलने वाले वाहनों के लिए सुरक्षा और टाइप-अप्रूवल से जुड़े नए नियमों का ड्राफ्ट जारी कर दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भविष्य के ईंधन माने जा रहे हाइड्रोजन की तकनीक को सुरक्षित, मानकीकृत और बड़े पैमाने पर अपनाने के लिए तैयार करना है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने इस ड्राफ्ट के जरिए उद्योग जगत से लेकर आम नागरिकों तक सभी स्टेकहोल्डर्स से अगले 30 दिनों के भीतर सुझाव मांगे हैं, जिससे देश के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से और अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाया जा सके।
हाइड्रोजन एक अत्यधिक ज्वलनशील गैस है, इसलिए इसकी सुरक्षा, स्टोरेज और उपयोग के लिए बेहद सख्त तकनीकी मानक तय किए गए हैं। जारी किए गए ड्राफ्ट के अनुसार, हाइड्रोजन से चलने वाले इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) वाहनों के लिए टाइप-अप्रूवल के नियम AIS 195:2023 के तहत निर्धारित होंगे, जबकि इनमें उपयोग होने वाले फ्यूल को IS 16061:2021 स्टैंडर्ड का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा। इसी तरह, कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट व्हीकल्स और भारी मशीनों के लिए AIS 195A:2024 जैसे कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे, जिससे औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक की गुंजाइश न रहे।
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हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित वाहनों के लिए भी सरकार ने बेहद स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें पैसेंजर और कमर्शियल वाहनों के लिए AIS 157:2020 मानक तय किया गया है। इन वाहनों के लिए फ्यूल की शुद्धता और गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानक ISO 14687 के अनुरूप होनी चाहिए। विशेष रूप से टू-व्हीलर और छोटे वाहनों के लिए भी AIS 206:2024 के तहत नियम लागू किए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि सरकार भविष्य में छोटे वाहनों के बाजार में भी हाइड्रोजन को एक बड़े विकल्प के रूप में देख रही है। इस नए फ्रेमवर्क से ऑटोमोबाइल कंपनियों को एक स्पष्ट रोडमैप मिलेगा, जिससे हाइड्रोजन वाहनों के रिसर्च, विकास और लॉन्चिंग में तेजी आएगी और निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा।
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