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रायपुर जशपुर 21 जनवरी 2026
उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगने और प्रयागराज में मौनी अमावस्या के अवसर पर उन्हें शाही स्नान से रोके जाने के मामले ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी और जिला कांग्रेस जशपुर ने इस पूरे घटनाक्रम को सनातन परंपरा धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान पर सीधा हमला बताया है।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने रायपुर में जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि भाजपा भगवान शंकराचार्य की सत्ता को चुनौती देने का दुस्साहस कर रही है। किसी भी राजनीतिक दल सरकार मुख्यमंत्री या प्रशासन को यह अधिकार नहीं है कि वह तय करे कौन शंकराचार्य है और कौन नहीं। शंकराचार्य की परंपरा गुरु शिष्य पर आधारित एक अटूट धार्मिक व्यवस्था है जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं हो सकता।
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दीपक बैज ने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के सामने सिर झुकाया था तब क्या वे शंकराचार्य नहीं थे। जब तक उन्होंने गोहत्या मंदिर प्राण प्रतिष्ठा और सत्ता से सवाल नहीं पूछे तब तक वे शंकराचार्य थे और जैसे ही उन्होंने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए अब उनसे दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमानों से कागज मांगते मांगते भाजपा अब शंकराचार्य से कागज मांगने लगी है जो पूरे हिंदू धर्म का अपमान है। सुप्रीम कोर्ट के 1954 के फैसले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि किसी को भी मठों के कामकाज में दखल देने का अधिकार नहीं है और योगी आदित्यनाथ द्वारा भेजा गया नोटिस कानून का उल्लंघन है।
इधर जशपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिला कांग्रेस अध्यक्ष यूड़ी मिंज ने प्रयागराज में मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य को शाही स्नान से रोके जाने और श्रद्धालुओं पर पुलिस बल प्रयोग की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक संत का अपमान नहीं बल्कि भारत की आत्मा धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक चेतना पर आघात है। शंकराचार्य कोई राजनीतिक व्यक्ति नहीं बल्कि सनातन धर्म की सर्वोच्च बौद्धिक और आध्यात्मिक परंपरा के प्रतीक हैं।
यूड़ी मिंज ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म के पालन की स्वतंत्रता है। क्या अब धर्म पालन के लिए सरकारी अनुमति जरूरी हो गई है क्या सरकार तय करेगी कि कौन शाही स्नान करेगा और कौन नहीं। यदि ऐसा है तो यह धर्म नहीं बल्कि सत्ता का नियंत्रण है। उन्होंने श्रद्धालुओं पर पुलिस बल प्रयोग को पूरी तरह अनुचित बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण श्रद्धालुओं पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
उन्होंने भाजपा पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के समय संत साधु और धर्म याद आते हैं लेकिन सत्ता में आने के बाद वही संत अगर सवाल पूछें तो उन्हें अपमानित किया जाता है। शंकराचार्य जी का अपराध केवल इतना है कि वे सत्ता के नहीं शास्त्र के प्रति निष्ठावान हैं। यही कारण है कि वे सत्ता को असहज करते हैं।
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पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष मनोज सागर यादव ने कहा कि जो सरकार संतों से डरती है वह जनता से क्या प्रेम करेगी। यह मामला किसी एक शंकराचार्य का नहीं बल्कि भारत की धार्मिक आत्मा और लोकतांत्रिक चेतना का है। कांग्रेस इस विषय पर चुप नहीं रहेगी और सड़क से संसद तक संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष करेगी।
कांग्रेस नेताओं ने केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट जवाब मांगते हुए कहा कि किस आधार पर शंकराचार्य को शाही स्नान से रोका गया क्या कोई लिखित आदेश था और क्या सत्ता समर्थक धार्मिक समूहों के साथ भी यही व्यवहार किया जाता है। कांग्रेस ने चेतावनी दी कि सनातन परंपरा पर किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।


