नई दिल्ली/रायपुर | 02 अप्रैल, 2026
छत्तीसगढ़, जो अपनी अनछुई प्राकृतिक सुंदरता, गरजते जलप्रपातों और घने जंगलों के कारण देश के नए ‘एडवेंचर हब’ के रूप में उभर रहा है, अब वहां साहसिक गतिविधियों को संचालित करने के तरीके पूरी तरह बदलने वाले हैं।
जानकारी के अनुसार, एडवेंचर पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा और सुविधाएं सुनिश्चित करना प्राथमिक रूप से राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। इसी दिशा में पर्यटन मंत्रालय ने ‘एडवेंचर सेफ्टी गाइडलाइंस’ का एक व्यापक ढांचा तैयार किया है, जिसे छत्तीसगढ़ सहित सभी राज्यों को कड़ाई से लागू करने और अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को अपडेट करने के निर्देश दिए गए हैं।
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छत्तीसगढ़ के लिए यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देश भर के मान्यता प्राप्त एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स की सूची में छत्तीसगढ़ की संख्या फिलहाल शून्य (0) है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बस्तर के चित्रकोट में रिवर राफ्टिंग, तीरथगढ़ में ट्रेकिंग, मैनपाट की पहाड़ियों में पैराग्लाइडिंग और धमतरी के गंगरेल बांध में वाटर स्पोर्ट्स कराने वाली स्थानीय एजेंसियां अभी तक राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के तहत पंजीकृत नहीं हैं।
अब इन सभी स्थानीय ऑपरेटर्स को केंद्र द्वारा निर्धारित लाइसेंसिंग नियमों और सुरक्षा मानकों के दायरे में आना अनिवार्य होगा, ताकि रोमांच का आनंद लेने आने वाले पर्यटकों की जान जोखिम में न पड़े।
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मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि वह एडवेंचर स्थलों पर होने वाली दुर्घटनाओं का अलग से कोई डेटा संधारित नहीं करता, इसलिए पूरी जवाबदेही अब छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड और स्थानीय प्रशासन की होगी। नए नियमों के तहत अब राज्य के हर एडवेंचर पॉइंट पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऑपरेटर्स द्वारा सुरक्षा उपकरणों की गुणवत्ता, प्रशिक्षित गाइड्स की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा सहायता जैसे मानकों का कड़ाई से पालन हो रहा है या नहीं।
यदि राज्य सरकार इन सुरक्षा नियमों को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारती है और स्थानीय एजेंसियों को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने में सफल रहती है, तो छत्तीसगढ़ आने वाले समय में देश का सबसे सुरक्षित और पसंदीदा एडवेंचर डेस्टिनेशन बनकर उभर सकता है।
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इस पहल का एक बड़ा सकारात्मक पहलू यह भी है कि व्यवस्थित और सुरक्षित एडवेंचर टूरिज्म से न केवल अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों का छत्तीसगढ़ पर भरोसा बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय जनजातीय युवाओं के लिए पेशेवर गाइड और ट्रेनर के रूप में रोजगार के नए और सम्मानजनक द्वार भी खुलेंगे। बस्तर और सरगुजा के ‘रॉ एडवेंचर’ को अब एक पेशेवर और सुरक्षित पहचान मिलने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और पर्यटन छवि दोनों को वैश्विक पटल पर मजबूती मिलेगी।
पर्यटन मंत्रालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, देश भर में मान्यता प्राप्त एडवेंचर टूरिज्म ऑपरेटर्स की राज्यवार संख्या नीचे दी गई है। यह सूची दर्शाती है कि साहसिक पर्यटन के मामले में कौन सा राज्य कितना संगठित और प्रमाणित है:
| क्र. सं. | राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | मान्यता प्राप्त ऑपरेटर्स की संख्या |
| 1. | दिल्ली | 21 |
| 2. | पश्चिम बंगाल | 16 |
| 3. | हरियाणा | 06 |
| 4. | कर्नाटक | 04 |
| 5. | महाराष्ट्र | 04 |
| 6. | उत्तर प्रदेश | 04 |
| 7. | तेलंगाना | 03 |
| 8. | उत्तराखंड | 03 |
| 9. | गुजरात | 02 |
| 10. | जम्मू और कश्मीर | 02 |
| 11. | केरल | 02 |
| 12. | मध्य प्रदेश | 02 |
| 13. | तमिलनाडु | 02 |
| 14. | आंध्र प्रदेश | 01 |
| 15. | बिहार | 01 |
| 16. | हिमाचल प्रदेश | 01 |
| 17. | झारखंड | 01 |
| 18. | पंजाब | 01 |
| 19. | सिक्किम | 01 |
| कुल | संपूर्ण भारत | 77 |
देश के मान्यता प्राप्त एडवेंचर टूरिज्म ऑपरेटर्स की सूची में एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। ताज्जुब की बात यह है कि साहसिक पर्यटन के लिए मशहूर हिमालयी राज्यों के बजाय दिल्ली (21) और पश्चिम बंगाल (16) में सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त ऑपरेटर्स सक्रिय हैं, जिसका मुख्य कारण इन महानगरों में बड़ी ट्रैवल कंपनियों के मुख्यालयों का होना माना जा रहा है।
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दूसरी ओर, छत्तीसगढ़ की स्थिति इस सूची में बेहद चिंताजनक है, जहाँ मान्यता प्राप्त ऑपरेटर्स की संख्या फिलहाल ‘शून्य’ (0) दर्ज की गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि बस्तर की वादियों और मैनपाट की पहाड़ियों में जो भी एडवेंचर गतिविधियाँ संचालित हो रही हैं, वे अभी तक केंद्र सरकार के सुरक्षा और लाइसेंसिंग मानकों के तहत पंजीकृत नहीं हो पाई हैं। इसी तरह, हिमाचल प्रदेश (01) और उत्तराखंड (03) जैसे प्रमुख एडवेंचर हब में भी पंजीकृत ऑपरेटर्स की संख्या उम्मीद से काफी कम है। यह आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि छत्तीसगढ़ सहित पहाड़ी राज्यों के स्थानीय ऑपरेटर्स को अब राष्ट्रीय प्रमाणीकरण (Certification) हासिल करने की सख्त जरूरत है, ताकि पर्यटकों की सुरक्षा और सेवाओं की गुणवत्ता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनिश्चित किया जा सके।
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