रायपुर। छत्तीसगढ़ के गृह विभाग द्वारा राज्य में अपराध की स्थिति को लेकर जारी ताजा आंकड़ों ने प्रशासन और पुलिस की चुनौतियों को उजागर कर दिया है। विधानसभा में प्रस्तुत की गई इस विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 तक की अवधि में राज्य के विभिन्न जिलों में गंभीर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। विशेष रूप से महिला सुरक्षा के मोर्चे पर स्थिति संवेदनशील बनी हुई है, जहाँ दर्ज कुल 2,455 आपराधिक प्रकरणों में से अकेले बलात्कार के ही 1,013 मामले सामने आए हैं।
रिपोर्ट के जिलावार विश्लेषण से पता चलता है कि जांजगीर-चांपा जिला कुल दर्ज मामलों के आधार पर सबसे संवेदनशील रहा है, जहाँ 168 आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए। इसके बाद बिलासपुर में 106 और राजधानी रायपुर में 96 मामले दर्ज हुए। बलरामपुर जिले में भी अपराध की स्थिति चिंताजनक है जहाँ कुल 165 मामले दर्ज किए गए, जबकि जशपुर और सूरजपुर जिलों में 156-156 प्रकरण सामने आए। सरगुजा संभाग के जिलों में अपराधों की यह उच्च संख्या कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अपराध की श्रेणियों पर गौर करें तो बलात्कार के मामलों में राजधानी रायपुर 67 मामलों के साथ सबसे आगे है, जिसके बाद रायगढ़ में 42 और महासमुंद में 39 मामले दर्ज किए गए। अन्य गंभीर अपराधों की बात करें तो राज्य भर में हत्या के 73, गंभीर चोट के 60 और अपहरण के 30 मामले दर्ज हुए हैं। वहीं चोरी की घटनाओं में जांजगीर जिला 61 मामलों के साथ शीर्ष पर रहा है।
पुलिस की कार्यप्रणाली और कानूनी कार्रवाई के मोर्चे पर रिपोर्ट बताती है कि विभाग ने तत्परता दिखाते हुए कुल दर्ज मामलों में से 2,269 प्रकरणों में न्यायालय के समक्ष चालान पेश कर दिया है। रायपुर में 90 और जांजगीर में 147 मामलों को कोर्ट तक पहुँचाया जा चुका है। हालांकि, न्याय की प्रक्रिया में अभी भी देरी बनी हुई है क्योंकि राज्य भर में 166 मामले अब भी विवेचना (Investigation) के लिए लंबित हैं। गृह विभाग के अनुभाग अधिकारी द्वारा हस्ताक्षरित यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जहाँ एक ओर पुलिस मामलों को सुलझाने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर बढ़ते अपराधों को रोकना शासन के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

