**जशपुरनगर।** छत्तीसगढ़ और झारखंड की सरहद पर बसे झारगांव के लिए इस बार की सुगबुगाहट कुछ खास है। दुलदुला ब्लॉक के बांसाताल पंचायत का यह आश्रित गांव, जो हर मानसून में बाहरी दुनिया से कटकर एक टापू में तब्दील हो जाता था, अब बहुत जल्द विकास की मुख्यधारा से जुड़ने जा रहा है।
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जिला पंचायत उपाध्यक्ष शौर्य प्रताप सिंह जूदेव की सक्रियता और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता ने ग्रामीणों के उस दशकों पुराने दर्द पर मरहम लगाया है, जो वे हर साल उफनते पहाड़ी नाले के किनारे खड़े होकर महसूस करते थे। मुख्यमंत्री ने इस महत्वपूर्ण पुल के निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की राशि को हरी झंडी दे दी है, जिसके बाद अब काम धरातल पर उतरने को तैयार है।
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बीते दिनों जब शौर्य प्रताप सिंह जूदेव भूमि पूजन के लिए झारगांव पहुंचे, तो वहां का नजारा किसी उत्सव से कम नहीं था। ढोल-नगाड़ों की गूंज और ग्रामीणों द्वारा की गई पुष्प वर्षा इस बात का प्रमाण थी कि 400 की आबादी वाले इस छोटे से गांव के लिए यह पुल महज ईंट और सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि उनके जीवन की नई लाइफलाइन है।
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वैदिक मंत्रोच्चार के साथ जूदेव ने जब पहली कुदाल चलाई, तो ग्रामीणों की आंखों में वह सुकून साफ देखा जा सकता था जो अक्सर स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान नाले के उस पार न जा पाने की बेबसी में खो जाता था।
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इस अवसर पर ग्रामीणों से रूबरू होते हुए शौर्य प्रताप सिंह जूदेव ने स्पष्ट किया कि विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश अब नक्सलवाद के अंधेरे से निकलकर विकास की रौशनी की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि किस तरह ग्रामीणों ने उन्हें बरसात के दिनों में होने वाली ‘कैद’ जैसी स्थिति से अवगत कराया था।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा सरकार जन-जन की समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है और यह पुल तय समय सीमा के भीतर पूरा कर लिया जाएगा। अब झारगांव के लोगों को बीमार होने पर नाले के शांत होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि यह पुल उनके लिए हर मौसम में उन्नति के द्वार खोल देगा।


