रायपुर | 03 अप्रैल, 2026
देश के पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का भव्य समापन हो गया है। जनजातीय खेल प्रतिभाओं के इस महाकुंभ में कर्नाटक ने अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। प्रतियोगिता के अंतिम दिन झारखंड की स्टार तीरंदाज कोमालिका बारी और ओडिशा के अर्जुन खारा ने स्वर्ण पदक जीतकर अपनी धाक जमाई, लेकिन पदक तालिका के शीर्ष पर काबिज कर्नाटक को कोई पीछे नहीं छोड़ सका।
पदक तालिका: टॉप पर दक्षिण, पूर्व का जलवा
इस ऐतिहासिक आयोजन में 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लगभग 3,800 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।
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कर्नाटक: 23 स्वर्ण, 8 रजत और 7 कांस्य पदकों के साथ पहले स्थान पर रहा। तैराकी में 15 गोल्ड जीतकर कर्नाटक ने पहले ही दिन से बढ़त बना ली थी।
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ओडिशा: 21 स्वर्ण और कुल 57 पदकों के साथ दूसरे स्थान पर रहा। ओडिशा एकमात्र ऐसा राज्य बना जिसने सभी 6 खेल विधाओं में कम से कम एक गोल्ड मेडल जीता।
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झारखंड: 16 स्वर्ण पदकों के साथ तीसरे स्थान पर रहा। एथलेटिक्स और तीरंदाजी में झारखंड के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला।
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छत्तीसगढ़: मेजबान छत्तीसगढ़ ने भी अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और 3 स्वर्ण, 10 रजत व 6 कांस्य जीतकर 9वां स्थान हासिल किया।
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अंतिम दिन का रोमांच: तीरंदाजी और फुटबॉल
खेलों के आखिरी दिन तीरंदाजी के रिकर्व इवेंट में झारखंड की कोमालिका बारी ने गुजरात की भार्गवी को हराकर महिला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीता। वहीं, पुरुष वर्ग में ओडिशा के अर्जुन खारा ने अपनी ही टीम के साथी को हराकर सोना जीता। हालांकि, पुरुष टीम इवेंट में झारखंड ने ओडिशा को 6-4 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
फुटबॉल के रोमांचक फाइनल में मेजबान छत्तीसगढ़ की टीम को पश्चिम बंगाल से 0-1 से हार का सामना करना पड़ा और उसे रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
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इन खिलाड़ियों ने रचा इतिहास
कर्नाटक के मणिकांत इन खेलों के सबसे चमकते सितारे रहे। उन्होंने अकेले 8 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि जनजातीय युवाओं में विश्व स्तरीय एथलीट बनने की क्षमता है। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल कर्नाटक को पदक तालिका में शीर्ष पर बनाए रखा, बल्कि उन्हें इस आयोजन का सबसे सफल खिलाड़ी (Most Successful Athlete) भी बना दिया। उनका मुख्य दबदबा तैराकी और ट्रैक इवेंट्स में देखा गया।
ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिला तैराकी वर्ग में अपनी अद्भुत गति और तकनीक से सबको हैरान कर दिया। 5 स्वर्ण पदक अपने नाम कर उन्होंने खुद को इन खेलों की ‘गोल्डन गर्ल’ के रूप में स्थापित किया। अंजलि का यह प्रदर्शन ओडिशा के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि ओडिशा एकमात्र ऐसा राज्य बना जिसने तैराकी सहित सभी छह मुख्य खेल विधाओं में स्वर्ण पदक हासिल किया।
पूर्व विश्व जूनियर चैंपियन कोमालिका बारी ने एक बार फिर सिद्ध किया कि वे बड़े मंच की खिलाड़ी हैं। रिकर्व तीरंदाजी के व्यक्तिगत फाइनल में गुजरात की भार्गवी भगोरा को हराकर उन्होंने स्वर्ण पदक जीता। झारखंड की तीरंदाजी टीम के लिए कोमालिका का अनुभव संजीवनी साबित हुआ, जिससे राज्य ने तीरंदाजी और एथलेटिक्स में अपनी पारंपरिक बढ़त बरकरार रखी।
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| खेल | स्वर्ण | रजत | कांस्य |
| महिला तीरंदाजी (Ind) | कोमालिका बारी (झारखंड) | भार्गवी भगोरा (गुजरात) | रुओविनुओ (नागालैंड) |
| पुरुष तीरंदाजी (Ind) | अर्जुन खारा (ओडिशा) | सोमनाथ हेम्ब्रम (ओडिशा) | पवन परमार (म.प्र.) |
| पुरुष फुटबॉल | पश्चिम बंगाल | छत्तीसगढ़ | अरुणाचल प्रदेश/गोवा |
| महिला तीरंदाजी (Team) | नागालैंड | झारखंड | मध्य प्रदेश |
जनजातीय प्रतिभा का वैश्विक उदय
इन खेलों ने साबित कर दिया कि भारत के आदिवासी अंचलों में विश्व स्तरीय प्रतिभा मौजूद है। कुल 25 राज्यों ने पदक तालिका में जगह बनाई, जिनमें से 20 राज्यों ने कम से कम एक स्वर्ण पदक जीता। महाराष्ट्र चौथे और अरुणाचल प्रदेश पांचवें स्थान पर रहा। छत्तीसगढ़ के लिए यह आयोजन न केवल पदक जीतने का था, बल्कि जनजातीय संस्कृति और खेल भावना के सफल प्रदर्शन का भी रहा।


