रायपुर: छत्तीसगढ़ में महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है। विधानसभा में प्रस्तुत नवीनतम आंकड़ों (प्रपत्र-अ) के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के 33 जिलों में कुल 38,135 महिला स्वयं सहायता समूह सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाएं संगठित होकर स्वरोजगार और सामुदायिक विकास की नई इबारत लिख रही हैं।
रायपुर और रायगढ़ में समूहों का जाल सबसे व्यापक सरकारी रिपोर्ट के विश्लेषण से पता चलता है कि राजधानी रायपुर जिला महिला समूहों के गठन में पूरे प्रदेश में अव्वल है, जहाँ 3,474 समूह कार्यरत हैं। इसके बाद रायगढ़ जिला दूसरे स्थान पर है, जहाँ 3,137 महिला समूहों का गठन किया गया है। अन्य प्रमुख जिलों में जांजगीर (2,488), जशपुर (2,418), बालोद (2,345) और जगदलपुर (2,187) में भी महिलाओं की भागीदारी अत्यंत उत्साहजनक दर्ज की गई है।
वनांचल और औद्योगिक जिलों में भी सशक्त होती महिलाएं प्रदेश के औद्योगिक और वनांचल क्षेत्रों में भी ‘नारी शक्ति’ का परचम लहरा रहा है। बिलासुपर में 2,022, कांकेर में 1,980 और कोरबा में 1,840 समूह गठित किए जा चुके हैं। दुर्ग संभाग की बात करें तो दुर्ग में 1,742 और धमतरी में 1,546 समूह संचालित हैं। सरगुजा संभाग के सरगुजा (1,439), कोरिया (1,445) और कवर्धा (1,217) में भी महिलाओं ने संगठित होकर अपनी पहचान बनाई है।
नए और छोटे जिलों की स्थिति सरकार द्वारा गठित नवीन जिलों में भी समूहों के गठन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। सक्ती जिले में 519, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 208 और मनेंद्रगढ़-भरतपुर-चिरमिरी में 112 समूह बन चुके हैं। वहीं, सुकमा (72), नारायणपुर (85) और बीजापुर (159) जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी महिलाओं का समूहों से जुड़ना एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है। कुल 38,135 समूहों के माध्यम से प्रदेश की लाखों महिलाएं आज सशक्तिकरण की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

