रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश के अंतिम व्यक्ति तक खाद्यान्न सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनी सार्वजनिक वितरण प्रणाली को और अधिक व्यापक बना दिया है। राज्य शासन द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 33 जिलों में कुल 14,085 उचित मूल्य दुकानें (Ration Shops) संचालित की जा रही हैं। यह नेटवर्क ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लाखों परिवारों को सुलभ और पारदर्शी तरीके से राशन उपलब्ध कराने का मुख्य माध्यम बना हुआ है।
रायपुर और बिलासपुर में दुकानों का सबसे बड़ा नेटवर्क जिलेवार जारी आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि राजधानी रायपुर जिला उचित मूल्य दुकानों की संख्या के मामले में पूरे प्रदेश में शीर्ष पर है, जहाँ कुल 717 दुकानें संचालित हैं। इसके बाद बिलासपुर का स्थान आता है, जहाँ 697 राशन दुकानें मौजूद हैं। अन्य प्रमुख जिलों में रायगढ़ (664), दुर्ग (657) और महासमुंद (593) में भी दुकानों का व्यापक जाल फैला हुआ है, जो आबादी के हिसाब से राशन वितरण की व्यवस्था को सुगम बनाता है।
वनांचल और सुदूर क्षेत्रों में भी मज़बूत पहुँच सरकार ने बस्तर और सरगुजा जैसे वनांचल क्षेत्रों में भी उचित मूल्य दुकानों की संख्या में बढ़ोतरी की है ताकि आदिवासियों और दूरदराज के ग्रामीणों को राशन के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। रिपोर्ट के मुताबिक, सूरजपुर में 535, सरगुजा में 525, कांकेर में 494 और बस्तर जिले में 488 दुकानें सक्रिय हैं। बस्तर संभाग के चुनौतीपूर्ण जिलों जैसे बीजापुर (218), सुकमा (211) और नारायणपुर (114) में भी राशन दुकानों का संचालन निरंतर जारी है।
नए जिलों में भी तेज़ी से फैला नेटवर्क राज्य के नवनिर्मित जिलों में भी राशन वितरण की बुनियादी व्यवस्था मज़बूत हुई है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सारंगढ़-बिलाईगढ़ में 391, सक्ती में 349 और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 261 उचित मूल्य दुकानें काम कर रही हैं। इसके अलावा बालोद (481), बेमेतरा (460) और कवर्धा (516) जैसे जिलों में भी वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया गया है। कुल 14,085 दुकानों के माध्यम से सरकार छत्तीसगढ़ को ‘कुपोषण मुक्त’ और ‘खाद्यान्न सुरक्षित’ राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर है।

