जगदलपुर। बस्तर की पावन धरा पर लोकतंत्र की एक नई और ऐतिहासिक बयार बह रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मजबूत सुरक्षा नीति और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के दृढ़ संकल्प से बस्तर में अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिल रहा है। नारायणपुर से शुरू हुई तीन दिवसीय विशाल ‘तिरंगा यात्रा’ के माध्यम से इस स्वतंत्रता दिवस पर संभाग के 90 से अधिक ऐसे अति-संवेदनशील गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने की ऐतिहासिक तैयारी है, जहां आजादी के बाद आज तक कभी राष्ट्रीय ध्वज नहीं लहराया जा सका था।
शहीदों की माटी से बनेगा भव्य स्मारक
12 से 14 अगस्त तक चलने वाली यह यात्रा नारायणपुर से शुरू होकर बारसूर, सुकमा, बीजापुर, ताड़मेटला और कर्रेगुट्टा पहाड़ी जैसे उन दुर्गम इलाकों से गुजर रही है, जो कभी हिंसा और डर के पर्याय माने जाते थे। यात्रा के दौरान उन पवित्र स्थानों की मिट्टी एकत्र की जा रही है, जहां जवानों और निर्दोष नागरिकों ने देश के लिए शहादत दी थी। इस माटी का उपयोग भविष्य में बनने वाले स्मारक में किया जाएगा।
भय से मुक्ति और विकास का नया दौर
गृह मंत्रालय की मजबूत सुरक्षा रणनीति और राज्य सरकार के प्रभावी कार्यान्वयन के चलते 31 मार्च तक माओवाद के खिलाफ अभियानों में निर्णायक सफलता मिली है। बस्तर में अब केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सड़कों का निर्माण, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास और लघु वनोपज प्रसंस्करण के जरिए रोजगार के नए अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं। कभी लाल आतंक का गढ़ रहे ये दूरस्थ क्षेत्र अब भयमुक्त होकर राष्ट्र निर्माण की मुख्यधारा से तेजी से जुड़ रहे हैं।


