नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब देश के युवाओं और छात्र शोधकर्ताओं को केवल दर्शक नहीं, बल्कि अंतरिक्ष मिशनों का सक्रिय हिस्सा बना रहा है। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के दौरान जानकारी दी कि सरकार अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में अब तक कुल 17 छात्र उपग्रहों और पेलोड को अधिकृत किया गया है, जिनमें से 11 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया जा चुका है। इन मिशनों में देश भर के विभिन्न संस्थानों जैसे भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान, एमिटी यूनिवर्सिटी और आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्रों ने अग्रणी भूमिका निभाई है।
इसरो और इन-स्पेस मिलकर छात्रों को वास्तविक परियोजनाओं पर काम करने का अवसर दे रहे हैं, जिसमें यूआर राव उपग्रह केंद्र तकनीकी मार्गदर्शन और प्रक्षेपण की सुविधाएं प्रदान कर रहा है। अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति इस रुचि को छोटे शहरों तक पहुँचाने के लिए देश के विभिन्न क्षेत्रों में छह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य दूसरे और तीसरे दर्जे के शहरों के प्रतिभावान छात्रों को स्वदेशी तकनीक विकसित करने के लिए प्रेरित करना है। इसके अतिरिक्त, छात्रों की शैक्षिक गतिविधियों के लिए प्रतिवर्ष लगभग 10 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है, जो युवाओं के नवाचारों को नई उड़ान देने में सहायक सिद्ध हो रहा है।
युवाओं को हुनरमंद बनाने के साथ-साथ सरकार उन्हें भविष्य के ‘अंतरिक्ष उद्यमी’ के रूप में भी तैयार कर रही है। एआईसीटीई ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित लघु पाठ्यक्रमों को मंजूरी दे दी है और राष्ट्रीय स्तर पर कई प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में आयोजित मॉडल रॉकेट्री प्रतियोगिता इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जहाँ सैकड़ों छात्रों ने खुद के बनाए रॉकेट लॉन्च किए। इन-स्पेस के माध्यम से नए स्टार्टअप्स को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और तकनीकी लैब की सुविधाएं भी दी जा रही हैं, जिससे भारत का अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र और अधिक समावेशी और जीवंत बन रहा है।

