छत्तीसगढ़ में मोबाइल टावर स्थापना को लेकर राज्य सरकार ने नीतिगत बदलावों और सुरक्षा मानकों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने विधानसभा में जानकारी दी है कि अब प्रदेश में मोबाइल टावर लगाने के लिए स्थानीय निकायों की भागदौड़ कम होगी।
भारत सरकार द्वारा जारी नए दूरसंचार (मार्ग के अधिकार) नियम 2024 के अंतर्गत अब टेलीकॉम टावर स्थापना के लिए ग्राम पंचायतों या नगरीय निकायों से अलग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेने का प्रावधान खत्म कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल ‘राइट ऑफ वे’ (RoW) पोर्टल के माध्यम से ही अनुमति दी जा रही है, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति आएगी। इसी क्रम में बिलासपुर जिले के आंकड़े साझा करते हुए बताया गया कि जनवरी 2026 तक मोबाइल टावर स्थापना के लिए कुल 426 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें निजी और सार्वजनिक दोनों संपत्तियां शामिल हैं।
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टावर रेडिएशन से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कथित दुष्प्रभावों को लेकर भी सरकार ने जनहित में स्थिति साफ की है। मुख्यमंत्री ने बताया कि टावर से निकलने वाली तरंगों को लेकर वैज्ञानिक शोधों और अंतर्राष्ट्रीय मानकों (जैसे ICNIRP) का हवाला देते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि बेस स्टेशन से निकलने वाले रेडियो आवृत्ति सिग्नल से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक साक्ष्य मौजूद नहीं है।
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शासन ने भरोसा दिलाया है कि टावर स्थापना के दौरान रेडिएशन स्तर की निगरानी केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप की जाती है। इस नए बदलाव से जहां एक ओर डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे के विकास में आने वाली प्रशासनिक अड़चनें भी दूर होंगी।

