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रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी की सड़कें इन दिनों सफेद लकीरों के बजाय खून के निशानों से रंगी नजर आ रही हैं। रायपुर में यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर जो ताजा आंकड़े सामने आए हैं, वे न केवल चौंकाने वाले हैं बल्कि शासन और प्रशासन की नींद उड़ा देने वाले हैं। परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने एक रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि बीते महज एक वर्ष के भीतर सड़क दुर्घटनाओं ने 6,898 लोगों की जान ली है। यह आंकड़ा बताता है कि रायपुर की सड़कों पर हर दिन कई घर उजड़ रहे हैं और कई हंसते-खेलते परिवार मातम में डूब रहे हैं।
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सड़कों पर मचे इस ‘रक्तपात’ ने शहर की ट्रैफिक प्लानिंग और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। तेज रफ्तार, डिवाइडरों की खामियां और यातायात नियमों के प्रति लापरवाही अब जानलेवा साबित हो रही है। इस भयावह स्थिति को देखते हुए परिवहन मंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार अब हाथ पर हाथ धरे नहीं बैठेगी। सुगम और सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए एक नई और प्रभावी रणनीति पर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है।
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सरकार की इस नई कार्ययोजना के तहत उन ‘ब्लैक स्पॉट्स’ को दुरुस्त किया जाएगा जहाँ सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। साथ ही, आधुनिक तकनीक और सख्त निगरानी के जरिए सड़कों पर बेलगाम दौड़ते वाहनों पर लगाम लगाने की तैयारी है। परिवहन मंत्री ने यह भी संवेदना व्यक्त की कि इन हादसों में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों की पीड़ा को कम नहीं किया जा सकता, लेकिन सरकार उनके आर्थिक सहयोग और मुआवजे के लिए प्रतिबद्ध है। मृतकों के परिजनों को समय पर सहायता राशि मिले, इसके लिए नियमों को और अधिक मानवीय बनाया जा रहा है
राजधानी की सड़कों को ‘मौत का गलियारा’ बनने से रोकने के लिए अब कड़े फैसलों की उम्मीद है, ताकि आने वाले समय में रायपुर की पहचान हादसों से नहीं, बल्कि सुरक्षित और सुव्यवस्थित यातायात से हो सके।


