“RTE एडमिशन 2026-27: पहले चरण का रजिस्ट्रेशन शुरू, 31 मार्च तक कर सकेंगे आवेदन”
दंतेवाड़ा | 16 फरवरी, 2026
बस्तर के वनांचलों में शिक्षा की नई अलख जगाने के लिए जिला प्रशासन दंतेवाड़ा और शिक्षार्थ ट्रस्ट ने मिलकर एक अत्यंत सराहनीय और अभिनव कदम उठाया है। इस संयुक्त पहल के तहत “विज्ञानदूत, मोबाइल एसटीईएम (STEM) बाइक” का औपचारिक शुभारंभ किया गया है, जिसका मुख्य ध्येय जिले के कुआकोंडा जैसे दुर्गम विकासखंडों के उन विद्यालयों तक आधुनिक शिक्षा पहुँचाना है जो अब तक इन संसाधनों से वंचित रहे हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित जैसे विषयों को विद्यार्थियों के लिए न केवल सुलभ बनाया जाएगा, बल्कि उन्हें रोचक और प्रभावी ढंग से पेश किया जाएगा ताकि बच्चों में इन विषयों के प्रति स्वाभाविक रुचि पैदा हो सके।
अब शिक्षा की कमान संभालेंगे ‘Frontier AI’ मॉडल! जानिए क्या बदलेगा क्लासरूम में…?
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का आगाज़ जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जयंत नाहटा ने हरी झंडी दिखाकर किया। इस गरिमामय अवसर पर जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रमोद ठाकुर और डीएमसी श्री हरीश गौतम सहित कई जनप्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और इस पहल को जिले में गुणवत्तापूर्ण एवं नवाचारी शिक्षा की दिशा में एक दूरगामी कदम बताया। यह मॉडल पूरी तरह से क्रियात्मक और प्रायोगिक शिक्षा पर आधारित है, जहाँ अत्याधुनिक शिक्षण किट से लैस मोटरसाइकिलें सीधे स्कूलों के आंगन तक पहुंचेंगी।
परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें प्रशिक्षित स्थानीय युवाओं को ‘विज्ञानदूत’ के रूप में तैयार किया गया है, जो चयनित 13 विद्यालयों में पहुँचकर बच्चों के साथ गतिविधि-आधारित शिक्षण सत्र संचालित करेंगे। इन सत्रों के माध्यम से बच्चों में केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि उनकी जिज्ञासा, तार्किक चिंतन और समस्या समाधान की क्षमताओं को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा। यह पहल न केवल विद्यार्थियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से लैस करेगी, बल्कि स्थानीय युवाओं को इस शिक्षण मॉडल से जोड़कर उनके लिए आजीविका के नए और सम्मानजनक अवसर भी प्रदान करेगी।
जनवरी में थोक महंगाई बढ़कर 1.81% पहुंची; विनिर्मित वस्तुओं ने बढ़ाया दबाव, पर सब्जियों ने दी राहत
प्रशासन, समुदाय और सामाजिक संस्था का यह अनूठा समन्वय दुर्गम अंचलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। यह मॉडल इस बात का प्रतीक है कि यदि सही तकनीक और बेहतर सोच का मेल हो, तो शिक्षा की गुणवत्ता को अंतिम छोर पर खड़े विद्यार्थी तक भी पहुँचाया जा सकता है। विज्ञानदूत की यह मोटरसाइकिलें अब दंतेवाड़ा के सुदूर क्षेत्रों में एक सकारात्मक और स्थायी परिवर्तन की नई पटकथा लिखने के लिए तैयार हैं।

