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छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने राज्य के शहरी विकास को एक नई और आधुनिक दिशा देने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के समग्र और संतुलित विकास के लिए ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ की शुरुआत की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बड़े महानगरों की तर्ज पर राज्य के उभरते हुए छोटे नगरों और कस्बों को भी आधुनिक नागरिक सुविधाओं से लैस करना है। राज्य शासन ने इस दूरगामी योजना को जमीन पर उतारने के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 200 करोड़ रुपए का भारी-भरकम प्रावधान किया है। इसे भी पढ़ें 

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नगरोत्थान योजना की तर्ज पर बदलेंगे छोटे शहर

यह योजना पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में बड़े नगर निगमों के लिए शुरू की गई ‘मुख्यमंत्री नगरोत्थान योजना’ के मॉडल पर आधारित है। अब इसी तर्ज पर नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में बुनियादी ढांचे (अधोसंरचना) को मजबूत किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सोच के अनुरूप, इस योजना के जरिए केवल सीमेंट और कंक्रीट का निर्माण नहीं होगा, बल्कि सड़कों, ड्रेनेज, और जलापूर्ति के साथ-साथ ई-गवर्नेंस, स्मार्ट ट्रैफिक, सुरक्षा प्रणाली, हरित क्षेत्र (ग्रीन जोन), नवीकरणीय ऊर्जा और जल संरक्षण जैसी स्मार्ट और आधुनिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी। इसके अलावा शहरों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सामुदायिक सेवाओं और रोजगार-व्यापार को बढ़ावा देने वाले प्रोजेक्ट्स पर भी फोकस किया जाएगा।

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पहले चरण में 32 नगरीय निकायों का चयन

छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार द्वारा शुरू की जा रही ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ के पहले चरण के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने राज्य के सभी पांचों संभागों से कुल 32 नगरीय निकायों का चयन किया है। विकास का संतुलन बनाए रखने और जमीनी स्तर तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाने के लिए सरकार ने इस सूची में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों दोनों को शामिल किया है, ताकि बड़े शहरों की तर्ज पर इन छोटे उभरते कस्बों का भी सुनियोजित विकास हो सके और स्थानीय स्तर पर ही नागरिकों को बेहतर जीवन स्तर मिल सके।

इस योजना के तहत सबसे ज्यादा प्राथमिकता बिलासपुर संभाग को दी गई है, जहां कुल नौ नगरीय निकायों का चयन हुआ है। इनमें तखतपुर, मुंगेली, लोरमी, जांजगीर-नैला और सक्ती जैसी पांच बड़ी नगर पालिकाओं के साथ-साथ बिल्हा, घरघोड़ा, पुसौर और सरिया जैसी चार नगर पंचायतें शामिल हैं। जांजगीर, मुंगेली, रायगढ़ और सक्ती जिलों के अंतर्गत आने वाले इन क्षेत्रों में इस योजना के माध्यम से बुनियादी ढांचे और स्मार्ट सुविधाओं को तेजी से अपग्रेड किया जाएगा, जिससे इन इलाकों का व्यापारिक और सामाजिक परिदृश्य पूरी तरह बदल जाएगा।

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आदिवासी बहुल और दूरस्थ अंचल होने के कारण बस्तर संभाग का चयन इस योजना में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहाँ पहले चरण में छह निकायों को शॉर्टलिस्ट किया गया है, जिसमें सुकमा नगर पालिका के साथ भोपालपटनम, गीदम,केशकाल, पखांजूर और नरहरपुर नगर पंचायत शामिल हैं। बीजापुर, दंतेवाड़ा, कोंडागांव, कांकेर और सुकमा जैसे अंदरूनी और संवेदनशील क्षेत्रों के इन छोटे व्यापारिक और प्रशासनिक केंद्रों में आधुनिक सुविधाएं पहुंचने से न केवल स्थानीय लोगों का जीवन आसान होगा, बल्कि इन क्षेत्रों में विकास की मुख्यधारा भी मजबूत होगी।

राजधानी के प्रभाव वाले रायपुर संभाग में भी छह नगरीय निकायों को विकास के इस नए मॉडल से जोड़ा गया है। इनमें कुरुद, महासमुंद, आरंग और बलौदाबाजार जैसी चार प्रमुख नगर पालिकाएं हैं, तो वहीं पिथौरा और चंदखुरी जैसी दो नगर पंचायतें भी शामिल हैं। रायपुर, धमतरी, महासमुंद और बलौदाबाजार जिलों के ये शहर भौगोलिक और आर्थिक रूप से तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषकर चंदखुरी जैसे सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के स्थल को इस योजना में शामिल करने से वहां पर्यटन और नागरिक सुविधाओं का बड़ा विस्तार होगा।

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उत्तर छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले सरगुजा संभाग से भी छह निकायों को इस योजना में अवसर मिला है। इसके तहत सूरजपुर, पत्थलगांव और मनेंद्रगढ़ जैसी तीन नगर पालिकाओं के साथ लखनपुर, कोतबा और कुनकुरी जैसी तीन नगर पंचायतों को चुना गया है। सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर और मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिलों के इन पथरीले और दुर्गम क्षेत्रों में ड्रेनेज, साफ पानी, सड़कों और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी समस्याओं का स्थायी समाधान करने में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।

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दुर्ग संभाग के अंतर्गत आने वाले कृषि और स्थानीय व्यापार पर आधारित पांच नगरीय निकायों को इस महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा बनाया गया है। इसमें पंडरिया और खैरागढ़ जैसी दो महत्वपूर्ण नगर पालिकाओं के साथ गुरूर, घुमका और छुईखदान जैसी तीन नगर पंचायतों का चयन हुआ है। कवर्धा, राजनांदगांव, बालोद और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिलों के इन कस्बों को आधुनिक नागरिक सेवाओं से जोड़कर सरकार ग्रामीण और शहरी आबादी के बीच के अंतर को कम करना चाहती है।

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इस पूरी संभागवार सूची के विश्लेषण से यह साफ जाहिर होता है कि राज्य सरकार का ध्यान केवल रायपुर या बिलासपुर जैसे बड़े महानगरों को चमकाने पर नहीं है, बल्कि वह राज्य के उन छोटे और मध्यम कस्बों को ‘स्मार्ट और आत्मनिर्भर’ बनाना चाहती है जहां बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसा करने से न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खुलेंगे, बल्कि ग्रामीण आबादी का बड़े शहरों की तरफ होने वाला पलायन भी काफी हद तक रुकेगा और पूरे प्रदेश का एक समान और संतुलित विकास सुनिश्चित हो सकेगा।

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स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मर्जी से तय होंगे काम, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट

योजना के पारदर्शी और समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए नगरीय प्रशासन विभाग के क्षेत्रीय (संभागीय) संयुक्त संचालकों की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों में तकनीकी विशेषज्ञों (कार्यपालन और सहायक अभियंताओं) को शामिल किया गया है। ये समितियां संबंधित शहरों के अध्यक्षों, पार्षदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ तालमेल बैठाकर वहां की जमीनी जरूरतों के हिसाब से प्राथमिकता तय करेंगी। समितियों को अगले 15 दिनों के भीतर साइट विजिट कर कार्यों का चयन करने और उनकी अनुमानित लागत की सूची शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। काम की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग के लिए मुख्य अभियंता को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि  “हमारी सुशासन सरकार बड़े शहरों के साथ-साथ उभरते नगरों और कस्बों के संतुलित एवं समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ के माध्यम से छोटे शहरों को भी बड़े शहरों की तरह सर्वसुविधायुक्त और आधुनिक बनाया जाएगा, जिससे प्रदेश के शहरी विकास को नई गति मिलेगी।”उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि  “यह योजना छोटे और मध्यम शहरों के व्यवस्थित विकास की दिशा में एक मील का पत्थर है। हमारी प्राथमिकता प्रदेश के हर नगर में नागरिकों को बेहतर अधोसंरचना और गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना है। संभाग स्तरीय समितियों के जरिए इस पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और परिणाममुखी बनाया गया है।”

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