रायपुर: छत्तीसगढ़ में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के भुगतान को लेकर हाल ही में जारी किए गए विभागीय आंकड़े राज्य की एक मिश्रित तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2023-24 की तुलना में वर्ष 2024-25 के दौरान छात्रवृत्ति भुगतान में आने वाली विफलताओं की कुल संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जो प्रशासनिक सुधारों का संकेत देती है। जहाँ पिछले शैक्षणिक सत्र में कुल 750 विद्यार्थियों का भुगतान किन्हीं कारणों से असफल रहा था, वहीं इस वर्ष यह संख्या घटकर 545 रह गई है।
हालांकि, इस सकारात्मक गिरावट के बावजूद राज्य के प्रमुख शिक्षा केंद्रों में स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। राजधानी रायपुर अभी भी सर्वाधिक 98 विफल भुगतानों के साथ सूची में सबसे ऊपर बनी हुई है।
सबसे अधिक चौंकाने वाले आंकड़े बिलासपुर और दुर्ग जिलों से सामने आए हैं, जहाँ पिछले साल की तुलना में विफलता की दर में भारी बढ़ोतरी हुई है। बिलासपुर में विफल भुगतानों की संख्या 56 से सीधे बढ़कर 114 हो गई है, जबकि दुर्ग में यह आंकड़ा 76 से बढ़कर 108 तक पहुंच गया है। इन दोनों बड़े जिलों में बढ़ती विफलता दर विद्यार्थियों के बीच चिंता का विषय बनी हुई है, क्योंकि बड़ी संख्या में छात्र अपनी छात्रवृत्ति राशि से वंचित हैं।
दूसरी ओर, राज्य के कुछ जिलों ने इस दिशा में अनुकरणीय कार्य किया है। बीजापुर, मोहला-मानपुर और सुकमा जैसे जिलों में विफलता का आंकड़ा शून्य रहा है, जिसका अर्थ है कि वहां के पात्र विद्यार्थियों को सुचारू रूप से भुगतान प्राप्त हुआ है। इसी तरह बलरामपुर, दंतेवाड़ा और धमतरी जैसे जिलों ने भी अपने पिछले रिकॉर्ड में सुधार करते हुए इस साल विफलता के मामलों को शून्य पर ला दिया है। बालोद और बलौदाबाजार जैसे जिलों में भी पिछले वर्ष की तुलना में विफलताओं में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई है। प्रशासन अब उन तकनीकी कारणों और बैंक केवाईसी संबंधी समस्याओं की जांच कर रहा है, जिनकी वजह से बड़े शहरों में भुगतान प्रक्रिया बाधित हो रही है।


