नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में देश के पर्यटन ढांचे को लेकर सरकार के रोडमैप की विस्तृत जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पर्यटन मंत्रालय ‘अतुल्य भारत’ अभियान के दूसरे चरण के माध्यम से अब अधिक केंद्रित और बाजार-विशिष्ट रणनीतियों पर काम कर रहा है, जिससे विदेशी सैलानियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
चिकित्सा पर्यटन के क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत करने के लिए सरकार ने विदेशी नागरिकों की यात्रा सुगम बनाई है, जिसके लिए ई-मेडिकल वीज़ा और ई-मेडिकल अटेंडेंट वीज़ा की सुविधा प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही, वाणिज्य मंत्रालय द्वारा तैयार की गई विशेष वेबसाइट के जरिए दुनिया भर के लोग भारत के मान्यता प्राप्त अस्पतालों और वेलनेस सेंटरों की जानकारी आसानी से प्राप्त कर पा रहे हैं।
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व्यावसायिक पर्यटन को गति देने के लिए मंत्रालय ने ‘मीट इन इंडिया’ (Meet in India) नामक विशेष पहल शुरू की है। इसके माध्यम से भारत को एक प्रमुख एमआईसीई (MICE) गंतव्य के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, जिसमें बेहतरीन कनेक्टिविटी और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का प्रदर्शन करने के लिए 60 से अधिक शहरों का डिजिटल कैटलॉग तैयार किया गया है। इसमें उन शहरों को प्राथमिकता दी गई है जिन्होंने जी-20 बैठकों की सफल मेजबानी की थी।
राजस्थान जैसे राज्यों के लिए केंद्र सरकार ने विशेष वित्तीय उदारता दिखाई है, जहाँ विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 685.19 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस बजट से जयपुर के जल महल, खाटू श्याम जी मंदिर, और सांभल झील जैसे महत्वपूर्ण स्थलों का कायाकल्प किया जा रहा है, ताकि यहाँ आने वाले पर्यटकों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
एडवेंचर और इको-टूरिज्म के क्षेत्र में सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। मंत्रालय ने एडवेंचर टूर ऑपरेटर्स के लिए सुरक्षा गाइडलाइंस तैयार कर सभी राज्यों को इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ (Travel for LiFE) कार्यक्रम के जरिए पर्यावरण के अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है।
ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए सरकार ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’ के तहत 1,000 होमस्टे विकसित कर रही है। इस योजना के अंतर्गत आदिवासी परिवारों को नए कमरे बनाने और पुराने कमरों के नवीनीकरण के लिए ₹3 लाख से ₹5 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है, ताकि ग्रामीण स्तर पर आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकें।
मंत्री महोदय ने स्पष्ट किया कि यद्यपि पर्यटन स्थलों का विकास मुख्य रूप से राज्य सरकारों का दायित्व है, लेकिन केंद्र सरकार स्वदेश दर्शन और प्रसाद (PRASHAD) जैसी योजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे के विकास के लिए निरंतर वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्रदान करती रहेगी।

