रायपुर 07 जनवरी 2026।
छत्तीसगढ़ में लागू किए गए जन विश्वास कानून को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि यह कानून अफसरशाही की राय पर तैयार किया गया, जो गरीब मजदूर विरोधी है और सीधे तौर पर पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाला साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के तहत 8 महत्वपूर्ण अधिनियमों के 163 उपबंधों में सैकड़ों संशोधन किए गए, लेकिन इससे पहले न तो प्रभावित वर्गों से संवाद किया गया, न मसौदे का प्रकाशन हुआ, न दावा आपत्ति का अवसर दिया गया और न ही विशेषज्ञों की राय ली गई।
सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि यह विधेयक विधानसभा के भीतर समुचित चर्चा के बिना, विपक्ष की अनुपस्थिति में शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन जबरिया ध्वनि मत से पारित किया गया, जो भाजपा के अधिनायकवादी रवैये का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के लिए कानून और सजा का भय जरूरी होता है, लेकिन जन विश्वास कानून में कई अपराधों को केवल आर्थिक दंड तक सीमित कर दिया गया है। इससे पैसे वाले अपराधियों में कानून का डर खत्म होगा और वे जुर्माना भरकर बच निकलेंगे।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि सरकार का यह दावा कि इस संशोधन से अपराधीकरण कम होगा, पूरी तरह तथ्यहीन है। वास्तविकता यह है कि कारावास के प्रावधान को हटाकर केवल जुर्माने का विकल्प देने से भ्रष्टाचार और अनुचित प्रभाव को बढ़ावा मिलेगा। अमीर जुर्माना भरकर छूट जाएगा, जबकि गरीब जुर्माने की राशि न जुटा पाने पर जेल जाने को मजबूर होगा।
उन्होंने बताया कि जिन कानूनों में संशोधन किए गए हैं, उनमें छत्तीसगढ़ औद्योगिक संबंध अधिनियम भी शामिल है। इस अधिनियम में सजा के स्थान पर केवल जुर्माने का प्रावधान उद्योगपतियों के हौसले बढ़ाएगा और श्रमिक संगठनों को दबाने का रास्ता खोलेगा। इसी तरह नगरी प्रशासन विभाग के नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, सोसायटी रजिस्ट्रीकरण अधिनियम और छत्तीसगढ़ सहकारी समिति अधिनियम में भी अनुचित बदलाव थोपे गए हैं।
सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि एक ओर जन विश्वास विधेयक को तत्परता से लागू किया गया, वहीं दूसरी ओर छत्तीसगढ़ विधानसभा से बहुमत से पारित 9 महत्वपूर्ण विधेयक आज भी राजभवन में लंबित हैं। इनमें एससी एसटी ओबीसी के शिक्षा और रोजगार से जुड़े नवीन आरक्षण विधेयक, कृषकों के हितों से संबंधित डीम्ड मंडी एक्ट और विश्वविद्यालय संशोधन अधिनियम जैसे अहम कानून शामिल हैं। इन विधेयकों पर गंभीरता न दिखाना भाजपा सरकार के जन विरोधी चरित्र को उजागर करता है और यह साफ करता है कि सरकार की प्राथमिकताओं में जन सरोकार शामिल नहीं हैं।

