अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतों में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय किसानों के हितों की रक्षा करते हुए रबी 2025-26 सीजन के लिए डीएपी (DAP) की कीमतों को स्थिर रखने का निर्णय लिया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि डीएपी का अधिकतम खुदरा मूल्य 1350 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग पर सीमित रखा जाएगा ताकि किसानों पर वित्तीय बोझ न पड़े। इस मूल्य को स्थिर रखने के लिए सरकार ने प्रति मीट्रिक टन 3500 रुपये का विशेष प्रावधान लागू किया है। इस सब्सिडी के दायरे में कारखाने से खेत तक की माल ढुलाई, जीएसटी घटक और निर्माताओं के लिए 4 प्रतिशत की गारंटीकृत उचित आय जैसी लागतें शामिल की गई हैं, जिससे वैश्विक बाजार की बढ़ती कीमतों का असर सीधे किसानों पर नहीं पड़ रहा है।
देश भर में उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। रसायन और उर्वरक मंत्रालय द्वारा 5 मार्च 2026 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, फॉस्फेट और पोटाश उर्वरकों की उपलब्धता मांग से कहीं अधिक बनी हुई है। देश में डीएपी की 51.38 एलएमटी की आवश्यकता के मुकाबले 71.89 एलएमटी उपलब्ध है। इसी प्रकार, एमओपी की 14.18 एलएमटी की आवश्यकता के मुकाबले 18.17 एलएमटी स्टॉक मौजूद है। एनपीकेएस की स्थिति भी काफी मजबूत है, जहां 76.48 एलएमटी की आनुपातिक आवश्यकता के मुकाबले 108.39 एलएमटी का भारी स्टॉक मौजूद है।
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सरकार इन उर्वरकों की आवाजाही पर कड़ी नजर रखने के लिए एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली यानी आईएफएमएस का उपयोग कर रही है। यह एक ऑनलाइन वेब-आधारित प्लेटफॉर्म है, जिसके जरिए उर्वरकों की हर खेप की स्थिति पर नजर रखी जाती है। इसके अलावा, रेल मंत्रालय के साथ घनिष्ठ समन्वय स्थापित कर रेक की आवाजाही को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि समय पर हर राज्य तक स्टॉक पहुंचना सुनिश्चित हो सके।
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मृदा स्वास्थ्य को सुधारने और यूरिया पर अत्यधिक निर्भरता को कम करने के लिए सरकार ने पोषक तत्व आधारित सब्सिडी ढांचे को भी संशोधित किया है। इसके तहत 10:26:26 और 12:32:16 जैसे उन्नत ग्रेड शामिल किए गए हैं, जो फसल और मिट्टी की जरूरत के अनुसार पोषक तत्वों का चयन करने की स्वतंत्रता देते हैं। अन्य प्रमुख उर्वरकों की कीमतों की बात करें तो एनपीके 10-26-26 का मूल्य 1814.82 रुपये, एनपीके 12-32-16 का मूल्य 1711.87 रुपये और म्यूरेट ऑफ पोटाश यानी एमओपी का मूल्य 1710.54 रुपये प्रति 50 किलोग्राम बैग निर्धारित किया गया है। रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने हाल ही में राज्यसभा में स्पष्ट किया कि यह रणनीतिक ढांचा न केवल किसानों को किफायती खाद उपलब्ध करा रहा है, बल्कि संतुलित पोषण के माध्यम से लंबे समय में मिट्टी की उर्वरता को भी संरक्षित कर रहा है।
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