जशपुरनगर। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में जहां पलायन की समस्या विकराल रूप लेती जा रही है, वहीं जशपुर जिले से एक सकारात्मक और राहत भरी तस्वीर सामने आई है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के ताजा आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि जशपुर जिले में रोजगार की तलाश में बाहर जाने वाले ग्रामीणों की संख्या में साल-दर-साल बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
लगातार गिरता ग्राफ: 439 से 276 पर पहुँचा आंकड़ा
सरकारी प्रपत्र के अनुसार, जशपुर जिले में वर्ष 2023-24 में पलायन से प्रभावित ग्रामों की संख्या 439 थी। यह आंकड़ा अगले ही वर्ष यानी 2024-25 में घटकर 312 पर आ गया। सुधार का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका, बल्कि वर्ष 2025-26 के नवीनतम आंकड़ों में यह और गिरकर 276 रह गया है।
> निष्कर्ष: मात्र तीन वर्षों के भीतर जशपुर जिले में पलायन प्रभावित ग्रामों की संख्या में लगभग 37% से 40% तक की कमी आई है। यह जिला प्रशासन और स्थानीय रोजगार योजनाओं की सफलता की ओर एक बड़ा संकेत है।
कबीरधाम और बिलासपुर के मुकाबले जशपुर की स्थिति बेहतर जहां एक ओर कबीरधाम (628 ग्राम) और बिलासपुर (438 ग्राम) जैसे जिलों में पलायन का ग्राफ या तो स्थिर है या बढ़ रहा है, वहीं जशपुर ने अपने स्तर पर इस पलायन को रोकने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। जिले में पलायन का मुख्य कारण अभी भी ‘रोजगार और जीविकोपार्जन’ ही दर्ज है, लेकिन प्रभावित ग्रामों की संख्या का घटना यह बताता है कि स्थानीय स्तर पर लोग अब आजीविका के साधनों से जुड़ रहे हैं।
प्रशासनिक मुहर और भविष्य की राह
विभाग के अनुभाग अधिकारी द्वारा जारी इस रिपोर्ट ने जशपुर के बदलते हालातों पर मुहर लगा दी है। हालांकि, जिले में अभी भी 276 गांव पलायन की जद में हैं, जो शासन-प्रशासन के लिए एक चुनौती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जशपुर में इसी तरह स्थानीय कौशल विकास और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलता रहा, तो आने वाले वर्षों में यह आंकड़ा ‘शून्य’ के करीब पहुँच सकता है।

